जागरण संवाददाता, राउरकेला : महानदी कोल फील्डस लिमिटेड (एमसीएल) सियामाल ओपन कोल माइंस से विस्थापित परिवारों की क्षतिपूर्ति की राशि पर दलालों व अधिकारियों की नजर है। विस्थापित राशि के लिए कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं एवं कुछ देने पर ही फाइल आगे बढ़ रही है। विस्थापितों एडीएम व आरआइ कार्यालय जाकर दस्तावेज जमा कर चुके हैं पर छह महीने बीतने के बाद भी रुपये नहीं मिले।

झूपरंगा गांव निवासी मंदना बड़ाइ का एमसीएल सियामाल ओपन कोल माइंस के लिए 3 एकड़ 24 डिसमिल जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए उसे 95.45 लाख रुपये मिलने चाहिए। रुपये पाने के लिए एमसीएल सियामाल के लिए नियोजित एडीएम व तहसीलदार के कार्यालय में दस्तावेज जमा किए हैं। छह महीने बीत जाने के बाद भी रुपये नहीं मिले और फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके लिए दो लाख रुपये अग्रिम मांगे जाने का आरोप उन्होंने लगाया है। इसी गांव के दिलीप प्रधान को भी दुर्दशा का सामना करना पड़ रहा है। जमीन के एवज में उसे डेढ़ करोड़ रुपये मिलना चाहिए था इसके लिए वह कार्यालय का चक्कर काट रहा है पर उसे राशि नहीं मिल रही है और न अधिकारी उसकी बात पर ध्यान दे रहे हैं। हलदीबहाल गांव के विस्थापित अंकुर बाग को जमीन के एवज में 48 लाख रुपये मिलना था। दलाल चतुराई से 12 लाख रुपये काट कर उसे दिए हैं। झुपरंगा गांव के मदना बड़ाइ, दिलीप प्रधान और हल्दीकुदर के अंकुर बाग तक यह सीमित नहीं है। वर्ष 2012-13 में एमसीएल सियामाल खदान के लिए झुपरंगा, पतरापाली, हल्दीबहाल, फिटिगपाड़ा, छटकेडीपा, स्कूलपाड़ा से तीन सौ से अधिक परिवारों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। घोषणा अनुसार क्षतिपूर्ति व पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विस्थापितों की राशि दस्तावेज जमा होने के चार दिन के भीतर सीधे लाभुकों के खाते में जाना चाहिए पर दलाल व भ्रष्ट अधिकारियों की मनमानी के चलते लोगों को इससे वंचित होना पड़ रहा है।

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