पुरी, जागरण संवाददाता : मुख्यमंत्री के सभी प्रकार की सहायता और सहयोग से पिछले 25 सालों से श्रृंखलित रूप से रथयात्रा संपन्न हो रही है। अब नवीन विरोधी शक्तियों द्वारा प्रशासन चल रहा है। इसीलिए आने वाले विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को विश्रृंखलित बनाने के साथ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को बदनाम करने के लिए षडयंत्र चल रहा है। जिसे सफल होने नहीं दिया जागा। श्रीमंदिर सत्व लिपि का उल्लंघन कर दइतापति सेवा सत्व, प्राप्य रकम काटने के लिए प्रशासन की तरफ से किए जा रहे षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्रीमंदिर के प्रमुख सेवायत दइतापति निजोग की तरफ से एक पत्रकार सम्मेलन में यह जानकारी दी गई है। इसके साथ ही निजोग पिछले मार्च महीने के 21 तारीख से महाप्रभु की नीति श्रृंखलित बनाने के उद्देश्य से श्रीमंदिर प्रशासन की ओर से लागू किए गए नूतन व्यवस्थावली का विरोध किया गया है। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन और सेवायत आमने सामने हैं। नूतन व्यवस्थावली लागू होने के बाद भी महाप्रभु की नीति में काफी देरी हो रही है। साधारण दर्शनार्थी महाप्रभु के दर्शन से वंचित होने के साथ महाप्रसाद नहीं पा रहे हैं। इसी लिए नूतन व्यवस्थावली को तुरन्त हटाने के लिए श्री जगन्नाथ सेवायत सम्मेलनी से लेकर विभिन्न निजोग, श्रीजगन्नाथ सेना, कटक वकील संघ, श्रीमंदिर परंपरा सुरक्षा मंच की तरफ से मांग किया गया है। दइतापति निजोग की तरफ से फैक्स के जरिए मुख्यमंत्री और मुख्य शासन सचिव के पास इस समस्या में हस्तक्षेप करने के लिए पत्र भेजा गया है। दइतापति निजोग की तरफ से आयोजित पत्रकार सम्मेलन में कहा गया है कि आने वाले दिनों में प्रशासन यदि ठीक रूप से कार्य नहीं करेगा, तो दइतापति सेवक महाप्रभु के नीति में विभ्राट नहीं करेंगे, मगर प्रशासन का सहयोग नहीं करेंगे। इस पत्रकार सम्मेलन में दइतापति निजोग के अध्यक्ष रामकृष्ण दास महापात्र, परिचालन कमेटी के सदस्य हलधर दास महापात्र, निजोग के साधारण संपादक प्रेमानंद दास महापात्र, श्री जगन्नाथ जी के बाड़ग्राही जगन्नाथ स्वांई महापात्र, सुभद्रा के बाड़ग्राही रामचन्द्र दास महापात्र, निजोग के युग्म संपादक विनायक दास महापात्र, गणेश दास महापात्र, कार्तिक दास महापात्र, चन्द्रशेखर दास महापात्र प्रमुख उपस्थित थे। निजोग के कार्यकर्ताओं ने श्रीमंदिर प्रशासन के स्वेच्छाचारी नीति का विरोध करने की बात कही है। त्रयोदशी से शयन पूर्णिमा तक सभी आय दइतापति लेने के समय श्रीमंदिर कर्मचारियों को उसमें से 20 प्रतिशत राशि दी जाती है, जिसके लिए स्वतंत्र कानून है। लेकिन प्रशासन महाप्रभु के दर्शन के लिए भक्तों को सुजोग नहीं दे रहा है। गर्भ गृह के साथ ही रथ के ऊपर भी साधारण दर्शनार्थियों को महाप्रभु के निकटतर होकर आलिंगनपूर्वक दर्शन करने की सुविधा से वंचित कर ही है। प्रशासन की इस स्वेच्छाचारी कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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