पुरी, जागरण संवाददताता :

पवित्र अक्षय तृतीया को श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की प्रसिद्ध चन्दन यात्रा शुरू हुई है। इसके साथ ही तीनों रथों के निर्माण का काम सुबह शुरू किया गया है। चन्दन यात्रा के लिए श्रीक्षेत्र चल चंचल हो उठा है। 21 दिन तक यह पारंपरिक चन्दन यात्रा मनाई जाएगी। श्रीजीओं के चलंति प्रतिमा मदन-मोहन, रामकृष्ण, लक्ष्मी-सरस्वती के साथ पांच पांडव के रूप में परिचित श्रीक्षेत्र के पंच महादेव श्री लोकनाथ, श्रीनीलकण्ठ, श्री कपाल मोचन, श्री मार्केण्डेय, श्री जमेश्वर, चन्दन यात्रा के शोभायात्रा में शामिल हुए थे। श्रीमंदिर में विभिन्न नीति के साथ जात भोग के बाद मध्याह्नं धूप सम्पन्न हुई थी। इसके बाद रथ निर्माण अनुकुल के लिए आज्ञामाल रथखला पर लिया गया। चन्दन ठाकुर, मणि विमान में विराजमान किए थे। विमान के साथ आज्ञा माल श्री नअर के सामने पहुंचने के बाद रथ की लकड़ी अनुकुल किया गया। चन्दन पटुआर के साथ तीन पूजा पण्डा सेवक आज्ञामाल के साथ रथखला को गए थे। पहले से 14 सोत्रीय ब्राह्मंाण आचार्य के रूप में यज्ञ और होम किए थे, जिसे बनजाग विधि कहा जाता है। श्रीमंदिर के पुरोहित तीन बार तीन लकड़ी में जल छिड़कने के साथ पुष्प चंदन लगाकर तीनों रथ के मुख्य महारणा और विश्वकर्मा को नारियल और सुपारी प्रदान किए थे। बाद में उनके माथे पर साड़ी बांधा गया। आचार्य के रूप में वरण होकर श्रीमंदिर के पुरोहित कालिका यंत्र में अभिमंत्रित सोने की कुल्हाड़ी लगाकर रथ निर्माण अनुकूल किए थे। बलभद्र, सुभद्रा और श्री जगन्नाथ रथ के मुख्य ंिवश्वकर्मा द्वारा लोहे की कुल्हाड़ी से तीनों रथ का निर्माण कार्य आरंभ किया गया। इस अवसर पर जिलाधीश अरविन्द अग्रवाल, एसपी अनूप साहू, श्रीमंदिर प्रशासक प्रमुख उपस्थित थे। रथ अनुकुल के बाद पालकी में प्रभु नरेन्द्र सरोवर यात्रा किए थे। नरेन्द्र सरोवर में पहुंचने के बाद महाप्रभु की चाप अनुष्ठित हुआ था।

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