पुरी : श्रीमंदिर के रत्‍‌नवेदी पर विराजमान चतुर्धा मूर्तियों सुदर्शनजी, बलभद्रजी, सुभद्राजी और जगन्नाथजी को पहण्डी विजय कराकर रथारूढ़ किया जाता है। सबसे आगे-आगे बड़े भाई बलभद्रजी का रथ तालध्वज चलता है उसके बाद देवी सुभद्राजी का रथ देवदलन रथ चलता है और पारिवारिक मर्यादा का निर्वहन करते हुए अंत में जगन्नाथजी का रथ नंदिघोष रथ 'जय जगन्नाथ' गगनभेदी जयकारे के साथ गुण्डीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करता है। रथों को खींचने का काम केवल भक्तगण ही करते हैं। रथयात्रा के दिन सायंकाल होने पर देवविग्रहों को रथ पर ही रहने दिया जाता है जहा पर भक्तगण रथारुढ़ देव विग्रहों के दर्शन का लाभ उठाते हैं। अगले दिन पहण्डी विजय के साथ देवविग्रहों को गुण्डीचा मंदिर लाया जाता है जहा पर वे सात दिनों तक विश्राम करते हैं और बीच में हेरापंचमी के दिन श्रीमंदिर से नाराज माता लक्ष्मीजी आती हैं लेकिन उनको महाप्रभु से गुण्डीचा मंदिर में मिलने से सेवायत मनाकर कर देते हैं जिसके फलस्वरुप वे जगन्नाथजी के बाहर खड़े नंदिघोष रथ के कुछ हिस्सों को तोड़कर चलीं जाती हैं। इसके उपरात सात दिनों के बाद देव विग्रहों की बाहुड़ा यात्रा कराकर भक्तगण उन्हें खींचकर श्रीमंदिर के सिंहद्वार के सामने लाते हैं जहा पर उनका सोना वेष होता है। श्रीमंदिर के स्वर्णकक्ष में रखे समस्त आभूषणो से देव विग्रहों को सुसज्जित किया जाता है और सोना वेष में भक्तगण महाप्रभु के दर्शन का लाभ उठाते हैं। उसके बाद अधरपड़ा होता,देव विग्रहों को शर्बत पिलाया जाता है और नीलादिं विजय के साथ महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़ेभाई बलभद्रजी और देवी सुभद्राजी के साथ पुन: अपने रत्‍‌नवेदी पर विराजमान होते हैं और विश्व मानवता को एकता,शाति और मैत्री का अपने दर्शन स्वरुप महाप्रसाद देते हैं और उस महाप्रसाद को ग्रहण कर विश्व मानवता प्रफुल्लित हो उठती है। सच कहा जाय तो पुरी धाम की महाप्रभु जगन्नाथजी रथयात्रा एक सास्कृतिक महोत्सव होती है जहा पर सर्वधर्म समन्वय का संदेश महाप्रभु जगन्नाथ देते हैं। यह यात्रा महाप्रभु की पतितपावनी यात्रा होती है जिसमें भक्तगण अपनी आखों से महाप्रभु के दर्शन कर अपने मानव जीवन को सफल बनाते हैं क्योंकि जगन्नाथजी नयनपथगामी हैं। भक्त उनसे केवल उनके दर्शन मात्र की ही प्रार्थना करता-'जगन्नाथस्वामी नयनपथगामी भवतुमे।''

------------

रथयात्रा संबंधी कार्यक्रम

रथयात्रा/गुण्डीचा यात्रा : 29 जून 2014

हेरापंचमी : 03 जुलाई 2014

बाहुड़ा यात्रा : 07 जुलाई 2014

सोना वेष : 08 जुलाई 2014

अधरपड़ा : 09 जुलाई 2014

नीलाद्रि विजय : 10 जुलाई 2014