पुरी, जागरण संवाददाता:

पुरी बेलाभूमि में मंगलवार को 150 कछुओं के मारे जाने की सूचना मिली है। संस्कृति विश्व विद्यालय से वन विभाग के सैकत निवास के बीच मौजूद करीबन 3 किलोमीटर इलाके में इन कछुओं को मरा पाया गया है।

विश्व समुद्री परिवेश को सुरक्षा देने वाले अलिभ रिडले कछुए ओडिशा तट को आ रहे है। ये कछुए बेलाभूमि के 5 किमी. तक मिलते है और इसके बाद बेलाभूमि में अंडा देने के लिए आते है। अंडा देने के रास्ते में ये ट्रालर व मोटर चालित नावों की जाल में फंस जाते है। जाल में फंसे इन कछुओं की आंख फोड़ दी जाती है और बाद में इन्हे समुद्र में छोड़ दिया जाता है। आंख फुट जाने से उन्हे कुछ दिखाई नहीं देता और वे दुर्घटना का शिकार हो जाते है। ओडिशा तट पर आने वाले इन विरल प्रजाति के कछुओं की नृशंस रूप से हत्या की जाती है। ट्रालर तथा मोटर चालित नाव की चोट से मृत कछुए बेलाभूमि समुद्र के किनार लग रहे है। प्रत्येक 10 से 20 मिनट पर मृत कछुए बेलाभूमि के किनारे मिल रहे है। पुरी वन विभाग की तरफ से बेलाभूमि में लगने वाले इन कछुओं को गाड़ने के लिए 10 कर्मचारियों को नियोजित किया गया है। जिन जगहों पर पर्यटक नहीं जा रहे है, वहां पर लवारिस की तरह मृत कछुए पड़े रहते है। बेलाभूमि से मात्र 500 मीटर की दूरी पर पड़े रहने वाले इन मृत कछुओं के बारे में वन विभाग कर्मचारियों को पता नहीं चलता है। इस साल मृत कछुओं की संख्या ने हर साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इस संबंध में वन विभाग अधिकारी अनंत कर ने कहा है कि हमें कुछ पता नहीं है। मंगलवार अपराह्न 4 बजे महाप्रभु के दर्शन के लिए श्रीमंदिर जाने से बेलाभूमि का परिदर्शन करेगे।

पुरी समुद्र तट में कछुआ सुरक्षा के लिए 60 लाख रुपये का अनुदान वन विभाग को आता है। इस राशि वन विभाग पेट्रोलिंग कर ट्रालर व मोटर चालित नाव पर रोक लगाएगी, मगर किसी भी दिन पेट्रोलिंग न होने से इस तरह घटना आए दिन घट रही है। वन विभाग के इस अवहेलना की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए लोगों ने मांग किया है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर