संसू, बामड़ा : बामड़ा वाइल्ड लाइफ डिवीजन अंतर्गत ऊषाकोठी अभ्यारण्य के अंदर बसा है छोटा सा गांव मायापाल, जो कुचिडा अनुमंडल स्थित जमनकिरा प्रखंड के कुलुंडी पंचायत का हिस्सा है। बामड़ा वाइल्ड लाइफ डिवीजन में ऊषाकोठी और बड़रमा अभ्यारण्य के अंदर 27 राजस्व गांव बसे हुए हैं। इन्हीं गांवों में से एक है मायापाल गांव। इस गांव तक पहुंचने के लिए कई बरसाती नालों को पार करना पड़ता है। इस गांव में सड़क, बिजली व शिक्षा की मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। गांव में लगभग 25 आदिवासी परिवार रहते हैं। ये लोग हर एक चुनाव में हिस्सा लेते हैं, फिर भी जनप्रतिनिधि चुनाव के बाद गांव का रास्ता व किए गए वादे भूल जाते हैं। गांव के साम्रा मुंडा, कृपा सुरीन, रॉयल मुंडा, सीमन पात्र ने जनप्रतिनिधियों पर यह आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में नाले उफान पर होने से गांव जलमग्न हो जाता है। बीमार पड़ने पर खाट पर लाद कर ले अस्पताल ले जाना पड़ता है। सरकारी भत्ता, चावल आदि लाने के लिए मिलों पैदल चलना पड़ता है। गांव में बिजली के खंभे है। घरों में मीटर भी लगे हुए हैं, फिर भी बिजली नहीं रहती। े लोग अपने घर को ढिबरी की रोशनी से रोशन करते हैं। कुलुंडी सरपंच से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि नूनभेट गांव तक सड़क बन गई है। अब नूनभेंट से मायापाल तक सड़क का निर्माण कराया जाएगा। पंचायत पीईओ मित्रभानु पटेल ने कहा कि बरसाती नाले पर पुल बनाने के लिए फंड नहीं है। फंड आवंटित होने पर पुल बनाया जाएगा। ग्रामीणों को पीडीएस सामग्री देने के लिए नूनभेट गांव तक वाहन से चावल, गेहूं लाया जाता है। फिर यहां से मायापाल के ग्रामीण चावल लेते हैं। वाहन का भाड़ा भी ग्रामीण ही देते हैं। पीने के पानी के लिए गांव में ट्यूबवेल भी लगाए गए हैं। पंचायत के कांग्रेसी नेता संग्राम केसरी नाथ ने कहा कि आजादी के 75 साल पूरे होने पर भी सरकारी योजनाओं से ग्रामीण कोसों दूर है मायापाल गांव। बीजेडी नेता सुशांत कुमार मेहर ने कहा कि मायापाल के ग्रामीणों को जल्द ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासनिक और जन प्रतिनिधियों की उदासीनता से इस क्षेत्र के ग्रामीण मायूस हैं।

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