कटक, जेएनएन। पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में मौजूद जलक्रीड़ा मंडप, झूलन मंडप के साथ मुक्ति मंडप, मां मंगला मंदिर आदि नृ¨सह मंदिर, मां महालक्ष्मी मंदिर एवं सूर्य मंदिर के जल्द मरम्मत करने की जरूरत है। यह उल्लेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्था (एएसआइ) की ओर से मंगलवार को हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में किया गया है। बताया गया है कि श्रीमंदिर परिसर में मौजूद अन्य देवी-देवताओं के मंदिर एवं मंडपों की एएसआइ के इंजीनियरों ने जांच की है। जांच से पता चला है कि उपरोक्त 6 मंदिर की अविलंब मरम्मत की आवश्यकता है।

इसके साथ ही पातालेश्वर मंदिर, बैकुंटेश्वर मंदिर, मां अन्नपूर्णा मंदिर, राम मंदिर, हनुमान मंदिर की भी मरम्मत करने की जरूरत है। सिंहद्वार एवं पश्चिम द्वार के भीतर गुमुट के साथ प्रतिहारी निजोग-राधाकृष्ण मंदिर की भी मरम्मत करने की भी एएसआइ ने आवश्यकता बतायी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विनीत शरण एवं डॉ. जस्टिस वीआर षाडंगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कर अविलंब मंदिर परिसर में मौजूद सभी मंदिर, मंडप एवं द्वार के भीतर गुमुट के मरम्मत करने को कदम उठाने को एएसआइ को निर्देश दिया है। अगली सुनवाई के समय इन तमाम मरम्मत कार्यों के संदर्भ में सविशेष रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अदालत ने कहा है।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में एएसआइ सुपरिटेंडिंग आॅर्कियोलॉजिस्ट एचए नायक की ओर से दायर हलफनामा में जय विजय द्वार मरम्मत कार्य को 12 मई से शुरू करने की जानकारी दी गई है। हाईकोर्ट ने श्रीमंदिर प्रशासन को मरम्मत कार्य के समय एएसआइ को पूर्ण सहयोग देने निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई आगामी 5 जुलाई को होगी। आवेदनकारी अभिषेक दास की ओर से वरिष्ठ वकील डॉ.अशोक कुमार महापात्र, सूर्य प्रकाश आर्त विद्याधर मंगराज, त्रिलोचन दास, सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल सूर्य नारायण मिश्र, जीए रमाकांत महापात्र, एएसआइ की तरफ से सीजीसी चन्द्रकांत प्रधान ने मामले में बहस की।