कटक : विदेशों से ज्यादा हमारे देश के अंदर कालाधन छिपा है। कालाधन देश के अंदर मौजूद होने के बावजूद वह नजर नहीं आ रहा है। वह कैसे बाहर आ सकेगा एवं वह देश के बाहर नहीं जा पाएगा इसके लिए विशेष नजर रखी जा रही है। यह जानकारी एसआइटी के उपाध्यक्ष अरिजीत पशायत ने दी। उन्होंने कहा कि ओडिशा निजी शिक्षानुष्ठान व चैरिटबेल ट्रस्ट में काफी कालाधन निवेश हुआ है। आयकर विभाग इसकी जाच कर इस बारे में तथ्य जुटाए इस पर उन्होंने अहमियत दिया। ऑपरेशन कालाधन मुद्दे को लेकर कटक में जस्टिस पशायत के आह्वान पर चली बैठक में क्राइमब्राच के एडीजी, सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेट्रिक्स, केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद प्रवर्तन निदेशालय, वाणिज्य कर, आयकर, राज्य खान विभाग के अधिकारी एवं क्राइमब्रांच के एडीजी विजय कुमार शर्मा मौजूद थे। इस दौरान खासतौर पर देश के अंदर छिपे कालेधन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। चिटफंड से लेकर खान लीज एवं पाखंडी बाबाओं की संपत्ति के बारे में भी बैठक में जिक्र किया गया। चर्चा में रहा खान लीज का मुद्दा। लीज लेने वाली कई कंपनिया मनमानी कर खानों की खुदाई कर करोड़ों के टैक्स की ठगी की है। इसके अलावा निजी व व्यापारिक अनुष्ठानों में काफी कालेधन का निवेश हुआ है। उन्होंने कहा कि अब तक विदेशों में छह हजार करोड़ काले धन का पता चला है लेकिन देशभर में इससे भी काफी अधिक कालाधन छिपा है। कई घटनाओं में एच-1 फार्म का गलत इस्तेमाल कर ठगी की जा रही है। इसलिए एच-1 फार्म में बदलाव लाया जाना जरूरी है। खान विभाग के निदेशक दीपक महंती के मुताबिक जल्द ही एच-1 फार्म में बदलाव लाने के लिए खत लिखा जाएगा। विदेश में छिपे कालेधन पर एसआइटी कड़ी नजर रखे हुए है लेकिन देश के अंदर छिपे कालेधन को कैसा बाहर निकाला जाए इस पर चर्चा की गई।