ओडिशा के नियमगिरि पर्वत में वेदांता की वापसी से उबाल, 'नियम राजा' की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे आदिवासी
वेदांता ने 13 साल बाद नियमगिरि पर्वत में बॉक्साइट खनन के प्रयास फिर शुरू किए हैं, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया है।

वेदांता अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लोक सेवा भवन में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की। फोटो X/CMO_Odisha
HighLights
वेदांता ने नियमगिरि में बॉक्साइट खनन के प्रयास फिर शुरू किए।
मुख्यमंत्री ने खनन में सहयोग और रोजगार का आश्वासन दिया।
आदिवासी समुदाय 'नियम राजा' की रक्षा हेतु पुनः संगठित हो रहा।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। नियमगिरि पर्वत से बॉक्साइट खनन के लिए वेदांता ने 13 वर्ष बाद एक बार फिर प्रयास शुरू कर दिया है। वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ चर्चा के बाद यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नियमगिरि में बॉक्साइट खनन के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है तथा क्षेत्र के आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
नियम राजा की रक्षा के लिए संगठित होने लगे आदिवासी
अनिल अग्रवाल के इस बयान ने नियमगिरि क्षेत्र के आदिवासियों, विशेषकर डोंगरिया कंध समुदाय को चौंका दिया है। जानकारी के अनुसार, डोंगरिया कंध एक बार फिर अपने आराध्य देवता ‘नियम राजा’ की रक्षा के लिए संगठित होने लगे हैं।
गौरतलब है कि वेदांता पहले भी नियमगिरि के संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में बॉक्साइट खनन का प्रयास कर चुकी है। यह इलाका डोंगरिया कंध आदिवासियों का निवास क्षेत्र है और वे नियम राजा को अपना सर्वोच्च देवता मानकर पूजा करते हैं। खनन के प्रयासों के खिलाफ स्थानीय समुदाय के तीव्र विरोध के कारण कंपनी को पीछे हटना पड़ा था।
इसके बाद वेदांता और राज्य सरकार की कंपनी ओडिशा खनिज निगम (ओएमसी) ने लांजीगढ़ एल्यूमिना रिफाइनरी के लिए बॉक्साइट उपलब्ध कराने हेतु संयुक्त उद्यम बनाया, लेकिन नियमगिरि से खनन शुरू नहीं हो सका। आदिवासी समुदाय लगातार इस क्षेत्र में खनन का विरोध करता रहा है।
अब सीजीमाली बॉक्साइट खदान परियोजना में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के बाद वेदांता ने दोबारा नियमगिरि की ओर रुख किया है। अनिल अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि सीजीमाली परियोजना में कुछ विदेशी तत्वों द्वारा स्थानीय आदिवासियों को प्रभावित किए जाने के कारण खनन कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
हालांकि उनका दावा है कि अब आदिवासियों का विरोध पहले जैसा नहीं रहा है। इसके बावजूद वर्ष 2023 में सीजीमाली खदान का पट्टा मिलने के बाद भी कंपनी वहां खनन शुरू करना तो दूर, आवश्यक सड़क निर्माण तक नहीं कर सकी है।
नए विवाद को जन्म
वेदांता की नई पहल ने एक बार फिर विवाद को जन्म दे दिया है। अनिल अग्रवाल का कहना है कि राज्य सरकार इस परियोजना के पक्ष में है, लेकिन अतीत में नियमगिरि संरक्षण आंदोलन का समर्थन करने वाले कई नेता अब सत्तारूढ़ दल में मंत्री और विधायक हैं।
ऐसे में वे आदिम जनजातियों के साथ खड़े होंगे या कंपनी के पक्ष में, इसे लेकर क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2013 में हुए विरोध के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि नियमगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खदानों की खोज को स्थानीय ग्राम सभाओं की मंजूरी मिलनी जरूरी है। इसके बाद 12 ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव को सर्व समाज कार्य कर दिया जिससे 2013 में नियमगिरि बॉक्साइट खनन प्रोजेक्ट को ठंडा बस्ती में डाल दिया गया।
