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कुदरत का करिश्मा! ओडिशा में 2 सिर और 3 हाथ वाले बच्चे का जन्म, जगा-बलिया के जुड़वा बच्चों की यादें फिर ताजा

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:11 AM (IST)

बरहमपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में एक दुर्लभ दो सिर वाले बच्चे का जन्म हुआ है, जिसका वजन 2.6 किलोग्राम है और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है।

ओडिशा में दो सिर वाला बच्चा। फोटो जागरण

ओडिशा में दो सिर वाला बच्चा। फोटो जागरण

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के कंधमाल जिले में दो सिर वाले बच्चों के जन्म को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में दो सिर वाले जुड़वां शिशु का जन्म हुआ है।

बच्चे का वजन 2.6 किलोग्राम है। उसकी सांस लेने में परेशानी होने के कारण उसे नवजात शिशु विशेष देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में रखा गया है।

कंधमाल जिले के तुमुडीबंध ब्लॉक के तिड़ीपदर गांव निवासी त्रिलोचन माझी की पत्नी रुनी माझी को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को बरहमपुर के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

यहां ऑपरेशन के जरिए उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। शिशु की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है।

जरूरत पड़ने पर उसे भुवनेश्वर स्थित एम्स रेफर किया जा सकता है। वहीं, ऑपरेशन के बाद मां की हालत स्थिर बताई गई है।

एक हृदय, एक यकृत और तीन हाथ

बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. मानस रंजन दास के अनुसार, नवजात के दो सिर और दो रीढ़ की हड्डियां हैं। उसके तीन हाथ और दो पैर हैं। हालांकि, हृदय, यकृत और जननांग एक ही हैं।

बच्चे में गुदा नहीं है, जिससे उसकी स्थिति और जटिल हो गई है। अल्ट्रासाउंड जांच में शरीर की अन्य विसंगतियों का भी पता चला है।

डॉ. दास ने बताया कि इस तरह के जन्म को चिकित्सा विज्ञान में 'पैरापैगस' कहा जाता है। यह संयुक्त जुड़वां (कंजॉइन्ड ट्विन्स) का अत्यंत दुर्लभ प्रकार है।

ऐसे मामले करीब तीन से चार लाख जन्मों में एक बार सामने आते हैं। इन बच्चों का इलाज बेहद जटिल और संवेदनशील होता है। जननांग एक ही होने के कारण संभावित सर्जरी और अन्य वैकल्पिक उपचारों पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की टीम बच्चे का इलाज कर रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उपचार में सहायता के लिए सरकार से भी अनुरोध किया गया है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की जन्मजात स्थिति का संबंध भ्रूण के विकास में असामान्यता से हो सकता है। हालांकि, इसके सटीक कारण का निर्धारण चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

जगा-बलिया की यादें फिर ताजा

कंधमाल जिला इससे पहले भी दो सिर वाले जुड़वां बच्चों के कारण देशभर में चर्चा में रहा है। वर्ष 2017 में जिले के फिरिंगिया ब्लॉक के मिलिपड़ा गांव के जगाबलिया (जगा और बलिया) सुर्खियों में आए थे।

दोनों को अलग करने के लिए दिल्ली स्थित एम्स में 45 घंटे से अधिक समय तक जटिल ऑपरेशन किया गया था। अक्टूबर 2017 में दोनों को अलग करने में डॉक्टरों को सफलता मिली थी।

हालांकि, इस ऑपरेशन के करीब तीन साल बाद 25 नवंबर 2020 को कटक के बड़े अस्पताल में इलाज के दौरान बलिया की मौत हो गई थी।

जगन्नाथ, जिसे जगा के नाम से जाना जाता है, अब पूरी तरह स्वस्थ है। नए मामले ने एक बार फिर उस दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति की ओर लोगों का ध्यान खींचा है।

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