2 सिर; 2 रीढ़ की हड्डी और 1 दिल, ओडिशा में अनोखे बच्चे के जन्म से डॉक्टर हैरान
ओडिशा के बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में दो सिर, एक शरीर और एक हृदय वाले एक दुर्लभ शिशु का जन्म हुआ है।

ओडिशा में अनोखे बच्चे के जन्म से डॉक्टर हैरान (AI Generated Image)
HighLights
बरहमपुर में दो सिर वाले दुर्लभ शिशु का जन्म।
नवजात का शरीर एक, हृदय एक, रीढ़ की हड्डी दो।
शिशु की हालत गंभीर, विशेषज्ञ कर रहे देखभाल।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक दुर्लभ शिशु का जन्म हुआ है। नवजात के शरीर में दो सिर हैं, लेकिन शरीर और हृदय एक ही है। दोनों सिर छाती से जुड़े हुए हैं और शिशु में दो रीढ़ की हड्डियां हैं।
इस दुर्लभ शारीरिक संरचना वाले बच्चे के जन्म के बाद परिवार के लोग चिंतित हैं। वहीं, डॉक्टर भी शिशु की देखभाल और स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सतर्क हैं।
पिछले रविवार को कंधमाल जिले के तुमुड़िबंध क्षेत्र की एक गर्भवती महिला को एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहीं महिला ने बच्चे को जन्म दिया।
जन्म के बाद नवजात की असामान्य शारीरिक संरचना देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। इसके बाद स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से तत्काल शिशु को अस्पताल के शिशु रोग विभाग के विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया।
पिछले दो दिनों से नवजात को निगरानी में रखकर इलाज किया जा रहा है। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
कितना है बच्चे का वजन?
डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के समय शिशु का वजन 2.6 किलोग्राम था। शिशु रोग विभाग के कई वरिष्ठ चिकित्सक उसकी देखभाल में जुटे हैं।
शिशु शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर द्वारा नवजात की विस्तृत जांच और परीक्षण किए जाने के बाद आगे के उपचार को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर बच्चे को बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर स्थित एम्स या किसी अन्य बड़े अस्पताल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
पहली संतान के जन्म के बाद परिवार चिंतित
कंधमाल जिले के तुमुड़िबंध क्षेत्र के तिड़िपदर गांव निवासी त्रिलोचन माझी और रुनी माझी के घर इस बच्चे का जन्म हुआ है। यह दंपती की पहली संतान है। बच्चे के जन्म को लेकर परिवार में काफी खुशी थी, लेकिन नवजात की शारीरिक संरचना देखने के बाद उनकी खुशियां चिंता में बदल गईं।
बच्चे के पिता ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ऐसी स्थिति में वे क्या करें। एक ओर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तो दूसरी ओर बच्चे के इलाज और देखभाल पर होने वाले खर्च को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
परिवार के सदस्यों को आशंका है कि बच्चे की देखभाल और उपचार के लिए उन्हें काफी खर्च करना पड़ सकता है। फिलहाल उनकी सबसे बड़ी चिंता यही है कि नवजात को उचित इलाज मिल सके और वह सुरक्षित जीवन जी सके।
