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दक्षिण पूर्व रेलवे की नई पहल: टूनिया स्टेशन मास्टर के हाथ में होगी गेट की कमान, बिना इजाजत नहीं खुलेगा फाटक

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:54 PM (IST)

झारखंड के टूनिया स्टेशन पर रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर 183 को अत्याधुनिक ऑप्टिकल फाइबर रिले रिपीटर (ओएफआरआर) तकनीक से लैस किया गया है।

दक्षिण पूर्व रेलवे की नई पहल। (जागरण)

दक्षिण पूर्व रेलवे की नई पहल। (जागरण)

HighLights

  1. टूनिया स्टेशन का एलसी गेट 183 ओएफआरआर तकनीक से अपग्रेड।

  2. गेट अब सीधे स्टेशन मास्टर की अनुमति से ही खुलेगा।

  3. कम लागत में बढ़ी रेलवे सुरक्षा, मानवीय भूलें होंगी खत्म।

जागरण संवाददाता, राउरकेला। रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों और मानवीय भूल की गुंजाइश अब बीते दिनों की बात होने वाली है।

झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले अति-व्यस्त हावड़ा मुंबई मुख्य रेल मार्ग के चक्रधरपुर-राउरकेला रेलखंड पर सफर अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गया है।

दक्षिण पूर्व रेलवे ने एक बड़ी और अहम पहल करते हुए झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में पड़ने वाले टूनिया स्टेशन (किमी 339/19-21) के पास स्थित लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट नंबर 183 को पूरी तरह से हाई-टेक कर दिया है।

इस गेट को अत्याधुनिक ऑप्टिकल फाइबर रिले रिपीटर (ओएफआरआर) तकनीक से लैस किया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब सुरक्षा में सेंध लगने का कोई चांस ही नहीं है।

कल्पना कीजिए एक ऐसे रेलवे फाटक की जो केवल फोन कॉल या प्राइवेट नंबर के भरोसे चलता हो, जहां स्टेशन पर बैठे अधिकारियों को यह तकनीकी रूप से पता ही न चले कि गेट खुला है या बंद।

पहले यह एलसी गेट नंबर 183 बिल्कुल ऐसा ही नॉन-इंटरलॉक्ड था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। इस नए सिस्टम के तहत गेट की डोर सीधे टूनिया स्टेशन के स्टेशन मास्टर के हाथों में सौंप दी गई है।

स्टेशन मास्टर की अनुमति के बिना नहीं खुलेगा गेट

जब तक स्टेशन मास्टर की अनुमति नहीं मिलेगी और स्पष्ट हूटर कमांड नहीं बजेगा, तब तक यह गेट खुल ही नहीं सकता। बूम लॉकिंग और गेट के पूरी तरह बंद होने का पक्का इलेक्ट्रिक सबूत अब सीधे स्टेशन के पैनल पर रेड और ग्रीन इंडिकेशन के रूप में मिलेगा। इससे बिना अनुमति समय से पहले गेट खुलने जैसी जानलेवा गलतियां अब कभी नहीं होंगी।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि रेलवे ने इस अचूक सुरक्षा चक्र को किसी भारी-भरकम खर्च या तांबे की नई महंगी केबल बिछाए बिना ही तैयार कर लिया है।

पुराने डार्क ऑप्टिकल फाइबर का स्मार्ट इस्तेमाल करते हुए इसे बेहद कम बिजली से चलने वाला बनाया गया है। पुरानी प्राइवेट नंबर प्रणाली को भी बैकअप के तौर पर चालू रखा गया है।

कुल मिलाकर, पूर्ण इंटरलॉकिंग के इस सस्ते, तेज और शानदार विकल्प ने टूनिया स्टेशन के इस गेट को लाखों यात्रियों और मालगाड़ियों के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच बना दिया है।

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