मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। भ्रष्टाचार के विरोध में ओडिशा सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा घोटालों पर शून्य सहनशक्ति (जीरो टॉलरेंस) नीति के तहत सरकार ने 15 अधिकारियों को नौकरी से निलंबित कर दिया है और दो पूर्व अधिकारियों की पेंशन सुविधा को संपूर्ण रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। इन सभी अधिकारियों को राज्य भ्रष्टाचार निवारण विभाग ने भ्रष्टाचार का दोषी पाया है।

निलंबित किए गए अधिकारियों में वाणिज्य एवं परिवहन विभाग बौद्ध जिला के पूर्व आइएमवी देवी प्रसाद पाढ़ी, सहकारिता विभाग सुवर्णपुर जिला के डूंगरीपाली सहकारिता समिति के पूर्व संपादक देवदत्त दास, गृह निर्माण एवं नगर विकास विभाग उमरकोट नगरपालिका अक्ट्राई टैक्स के कालीप्रसाद सिंह, पंचायतीराज विभाग भद्रक जिला के धामनगर तहसील के पूर्व वरिष्ठ क्लर्क बटकृष्ण बारिक, पंचायती राज विभाग कालाहांडी जिला के केसिंगा ब्लॉक के पूर्व संपादक अशोक कुमार साहा, जूनागढ़ ब्लॉक के पूर्व पंचायत कार्यनिर्वाही अधिकारी प्रद्मुन सबर, बौद्ध जिला के मुर्षडी ग्राम पंचायत के पूर्व संपादक किशोर चंद्र प्रधान शामिल है।

वहीं जलसंपदा विभाग खुर्दा जिला के बाणपुर सालिया जलसेचन प्रकल्प के सहकारी इंजीनियर विजय कुमार साहू, भवानीपाटना आइटीडीए के पूर्व जूनियर इंजीनियर करुणाकर पंडा, मयूरभंज जिला के कुलिआणा ब्लॉक के पूर्व यंत्री कनिष्ठ मंगल सिंह मुंडा तथा वैद्यनाथ मांझी, मयूरभंज जिला के सरकणा ब्लॉक के पूर्व यंत्री प्रदीप चंद्र राउत, कालाहांडी जिला के थुआमुल-रामपुर आइटीडीए के पूर्व यंत्री निगमानंद पंडा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बीएमसी के स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ क्लर्क चितरंजन दास को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया गया है। इसके साथ ही जलसंपदा विभाग कालाहांडी जिला के आइटीडीए (सेवानिवृत्त) सहकारिता यंत्री अश्विनी कुमार शर्मा तथा डीआरडीए के (सेवानिवृत) एपीडी शशांक शेखर पटनायक की पेंशन बंद की गई है।

ओडिशा की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप