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ओडिशा: अंतरिक्ष से रखी जाएगी नजर, ISRO की 'आंख' और AI का 'दिमाग' संभालेगा भारतीय चाय का भविष्य

Published: Sun, 06 Sep 2026 04:22 PM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 04:50 PM (IST)

इसरो, एनआईटी राउरकेला और टी बोर्ड ने 'चायांकन' परियोजना के तहत चाय बागानों की निगरानी के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया है।

चाय की खेती। (जागरण)

चाय की खेती। (जागरण)

HighLights

  1. इसरो, एनआईटी, टी बोर्ड ने 'चायांकन' प्रोजेक्ट किया शुरू।

  2. सैटेलाइट, ड्रोन, एआई से चाय बागानों की होगी निगरानी।

  3. कीटों, जलवायु परिवर्तन से बचाव को मिलेगी पूर्व चेतावनी।

जागरण संवाददाता, राउरकेला। सुबह की जिस प्याली से भारत की दिनचर्या शुरू होती है, उस चाय की गुणवत्ता और पैदावार को अब अंतरिक्ष से नियंत्रित और संरक्षित किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन, कीटों के हमले और उपज में अनिश्चितता जैसी सदियों पुरानी चुनौतियों को मात देने के लिए देश के तीन प्रमुख संस्थानों ने एक ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी तकनीकी गठजोड़ किया है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) राउरकेला, इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और वाणिज्य मंत्रालय के अधीन टी बोर्ड इंडिया ने एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव रखी है, जिसे चायांकन नाम दिया गया है।

यह त्रिपक्षीय समझौता भारतीय कृषि में डेटा-संचालित क्रांति का नया अध्याय है। यह तीन वर्षीय एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पारंपरिक कृषि को अत्याधुनिक डेटा साइंस से जोड़ने का एक सटीक ब्लूप्रिंट है।

अप्रैल 2026 में शुरू हुए इस मिशन के तहत सैटेलाइट और ड्रोन्स (यूएवी) से मिलने वाले रिमोट सेंसिंग डेटा को चाय बागानों के जमीनी आंकड़ों के साथ सिंक्रनाइज किया जाएगा।

मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जटिल एल्गोरिदम यह तय करेंगे कि किस बागान की सेहत कैसी है, भविष्य में उपज कितनी होगी और सबसे महत्वपूर्ण कौन सी बीमारी या कीट कब हमला कर सकते हैं।

नुकसान से पहले किसानों को अलर्ट

यह एक ऐसी अचूक पूर्व चेतावनी प्रणाली होगी, जो नुकसान होने से पहले ही किसानों और हितधारकों को अलर्ट कर नीति-निर्माताओं को ठोस कदम उठाने का समय देगी।

odisha chay news

उपस्थित अधिकारीगण।

कोलकाता स्थित आरआरएससी-ईस्ट (एनआरएससी) में 27 अगस्त 2026 को इस त्रिपक्षीय एमओयू ने औपचारिक रूप लिया।

इस तकनीकी महात्वाकांक्षा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके साक्षी इसरो-एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान, एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव और टी बोर्ड के निदेशक (चाय विकास) एस. सुंदरराजन जैसे शीर्ष रणनीतिकार बने।

दस्तावेजों पर इसरो की ओर से डॉ. सुशील कुमार श्रीवास्तव, टी बोर्ड की सचिव डॉ. अमृता चक्रवर्ती और एनआईटी के डीन (एसआईरआईसीसीई) प्रो. सौरव चटर्जी ने मुहर लगाई।

यह एक ऐसा दुर्लभ मंच था जहां अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग और कृषि अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट हुए। कार्यक्रम में प्रोजेक्ट की प्रधान अन्वेषक डॉ. आरती पॉल, सह-अन्वेषक डॉ. अनिमा बिस्वाल, जे. नलिनी और एनआईटी के डॉ. अनूप नंदी ने इस तकनीक का खाका पेश किया।

यह महज एक अकादमिक शोध नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार की उस दूरगामी गवर्नेंस का हिस्सा है जहां प्रौद्योगिकी के जरिए कृषि प्रबंधन को जोखिम-मुक्त बनाया जा रहा है।

चायांकन के सफल होते ही भारतीय चाय उद्योग न केवल अपनी उत्पादकता के नए शिखर को छुएगा, बल्कि वैश्विक बाजार में स्मार्ट फार्मिंग और क्वालिटी कंट्रोल के एक ग्लोबल रोल मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

अंतरिक्ष की आंख और एआई का दिमाग अब भारत की चाय को एक ऐसा सुरक्षा कवच देने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना अब तक केवल विज्ञान कथाओं में ही की जाती थी।

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