Move to Jagran APP

तेल रिसाव की गंभीर समस्या का अब होगा समाधान, NIT राउरकेला में तैयार हुआ स्वदेशी स्पंज

NIT Raurkela समुद्री तेल रिसाव जीव-जंतुओं और वैश्विक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। तेल रिसाव होने से समुद्री जीव-जंतुओं की जान जा सकती है। वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस गंभीर से निपटने के लिए देशभर के वैज्ञानिक नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इस बीच एनआईटी राउरकेला के वैज्ञानिकों को बड़ी उपलब्धि हाथ लगी है।

By Mahendra Mahato Edited By: Shashank Shekhar Thu, 11 Jul 2024 08:25 PM (IST)
एनआइटी के स्‍पंज का निर्माण करने वाली टीम। फोटो- जागरण

महेंद्र महतो, राउरकेला। समुद्री तेल रिसाव, चाहे वह दुर्घटनावश हो या जानबूझकर, समुद्री जीवन, तटीय समुदायों और वैश्विक पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा है। तेल रिसाव से समुद्री पक्षियों, मछलियों और अन्य जीवों की मौत हो सकती है, साथ ही यह मैंग्रोव वनों और प्रवाल भित्तियों जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इसी दिशा में एनआइटी राउरकेला के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक ऐसा स्पंज विकसित किया है जो तेल को सोखने में अत्यधिक प्रभावी है और इसे कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आविष्कार तेल रिसाव की समस्या से निपटने के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज: एक नई आशा

एनआइटी के स्‍पंज का निर्माण करने वाली टीम।

एनआइटी राउरकेला के सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने डॉ. पार्थ साहा के नेतृत्व में एक विशेष प्रकार का 'सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज' बनाया है। शोधकर्ताओं की टीम में आद्या शक्ति दास, तंद्रारानी महंतो, अभिषेक कुमार शामिल हैं। इस शोध में लव दसारिया, गोपीनाथ एम, मीना कादमे, योगेंद्र महतो ने भी योगदान दिया है।

यह स्पंज पानी को पीछे हटाता है और तेल को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिससे यह पानी से तेल को अलग करने में अत्यधिक प्रभावी है। यह स्पंज अपने वजन से 100-110 गुना तक तेल और कार्बनिक साल्वैंट्स को अवशोषित कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे 20 बार इस्तेमाल करने के बाद भी इसकी प्रभावशीलता 95 प्रतिशत तक बनी रहती है।

पारंपरिक तरीकों से बेहतर

वर्तमान में तेल रिसाव को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके या तो महंगे हैं या पर्यावरण के लिए हानिकारक। आयल बूम, स्कीमर्स, रासायनिक डिस्पर्सेंट और बायोरेमेडिएशन जैसी तकनीकों की अपनी सीमाएं हैं और ये सभी स्थितियों में प्रभावी नहीं होते। वहीं, सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज एक सुरक्षित, प्रभावी और किफायती विकल्प प्रदान करता है।

कैसे काम करता है यह स्पंज?

इस स्पंज को बनाने के लिए मेलामाइन नामक एक अकार्बनिक यौगिक का उपयोग किया गया है। विशेष प्रक्रिया के माध्यम से स्पंज की संरचना को इस तरह से बदला गया है कि वह पानी को पीछे हटाता है और तेल को अपनी ओर आकर्षित करता है।

उपयोग के विविध तरीके

इस स्पंज को छोटे क्षेत्र के फैलाव के दौरान भारी तेल संग्रह के लिए फ्लैट स्ट्रिप्स के रूप में तैनात किया जा सकता है। तेल सोखने के बाद, स्पंज को निचोड़कर तेल को अलग किया जा सकता है और स्पंज को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

व्यावसायिक उपयोग की ओर कदम

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट प्राप्त कर लिया है और अब वे इसे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों से बातचीत कर रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान

सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज का आविष्कार समुद्री तेल प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आविष्कार न केवल पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करेगा बल्कि तेल रिसाव से होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम करेगा।

पारंपरिक तरीकों की सीमाएं

वर्तमान में तेल रिसाव को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों की अपनी सीमाएं हैं:

  • आयल बूम: ये तैरते हुए अवरोध तेल को फैलने से रोकने में मदद करते हैं, लेकिन ये खराब मौसम में प्रभावी नहीं होते और इनका वजन बढ़ने पर ये डूब सकते हैं।
  • स्कीमर्स: ये उपकरण पानी की सतह से तेल को हटाते हैं, लेकिन इनकी प्रभावशीलता तेल की चिपचिपाहट और मलबे की उपस्थिति पर निर्भर करती है।
  • रासायनिक डिस्पर्सेंट: ये रसायन तेल को छोटी बूंदों में तोड़ते हैं, लेकिन ये पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
  • बायोरेमेडिएशन: यह विधि तेल को तोड़ने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है, लेकिन यह एक धीमी प्रक्रिया है और बड़े पैमाने पर फैलाव के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • इन-सीटू बर्निंग: यह विधि तेल को जलाकर नष्ट करती है, लेकिन यह वायु प्रदूषण का कारण बनती है और सुरक्षा जोखिम पैदा करती है।

सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज की विशेषताएं

सुपरहाइड्रोफोबिक स्पंज उपरोक्त सभी तरीकों की कमियों को दूर करता है :

  • उच्च अवशोषण क्षमता: यह अपने वजन से कई गुना अधिक तेल सोख सकता है।
  • रिसाइकिलिंग: इसे कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह एक किफायती विकल्प बन जाता है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: यह किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं करता है।
  • उपयोग में आसानी: इसे आसानी से तैनात और संचालित किया जा सकता है।
  • विभिन्न प्रकार के तेलों के लिए प्रभावी: यह विभिन्न प्रकार के तेलों और कार्बनिक साल्वैंट्स को सोख सकता है।

ये भी पढ़ें- 

Puri Jagannath Mandir: रत्न भंडार खोलने की तारीख तय! मंदिर प्रबंधन समिति के इस कदम के बाद हलचल तेज

Jagannath Rath Yatra 2024: 'ये लीलामय की लीला...', प्रभु बलभद्र का चारमाल गिरने ऐसा क्यों बोलीं ओडिशा की डिप्टी CM?