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ओडिशा: पहली से 8वीं की किताबों में गड़बड़ी का मामला PMO पहुंचा, स्कूल शिक्षा विभाग से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:36 AM (IST)

ओडिशा की कक्षा पहली से आठवीं तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई त्रुटियों का मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय

प्रधानमंत्री कार्यालय 

HighLights

  1. स्कूली पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों का मामला पीएमओ तक पहुंचा।

  2. पीएमओ ने स्कूल शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

  3. त्रुटियों के कारण, खर्च और जिम्मेदारियों का ब्योरा तलब।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा की कक्षा पहली से आठवीं तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई त्रुटियों का मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच गया है। पीएमओ ने स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग से इस पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। 

विभाग से पूछा गया है कि पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियां कैसे हुईं, उन्हें प्रकाशित पुस्तकों में कैसे शामिल किया गया और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे।

खर्च का पूरा ब्योरा मांगा 

सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने विभाग से पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, संपादन, मुद्रण और प्रकाशन पर हुए खर्च का भी पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया है। पीएमओ का यह कदम सामने आने के बाद पाठ्यपुस्तक प्रकाशन प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।

मामले की शुरुआत भुवनेश्वर के आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप प्रधान की शिकायत से हुई। प्रधान ने 13 अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर पाठ्यपुस्तकों की छपाई में कथित वित्तीय अनियमितता, हितों के टकराव और मामले को दबाने के प्रयासों का आरोप लगाया था। इसके बाद पीएमओ ने आठ सितंबर को संबंधित शिकायत राज्य सरकार को भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए 

पीएमओ के पत्र में कहा गया है कि शिकायत में पाठ्यपुस्तकों की छपाई से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में नियमानुसार जांच कर शिकायतकर्ता को भी जवाब भेजा जाए। विभाग को अब यह बताना होगा कि त्रुटियां किन परिस्थितियों में हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

प्रदीप प्रधान ने आरोप लगाया है कि एक अधिकारी शुभ्रजीत नायक एक साथ वाणिज्य विभाग के अधीन सरकारी मुद्रणालय और स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग के पाठ्यपुस्तक मुद्रण प्रभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। 

सैकड़ों करोड़ रुपये के मुद्रण कार्य 

उन्होंने सवाल उठाया कि सैकड़ों करोड़ रुपये के मुद्रण कार्य से जुड़े दो अलग-अलग विभागों में एक ही व्यक्ति को जिम्मेदारी कैसे दी गई।

प्रधान ने यह भी दावा किया कि पाठ्यपुस्तक विवाद की जांच केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित रही, जबकि मुद्रण प्रक्रिया की जांच नहीं की गई। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें पीएमओ से हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी।

मामलों में हितों के टकराव के आरोप लगाए

आरटीआई कार्यकर्ता ने कुछ मामलों में हितों के टकराव के आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि एक अधिकारी की पत्नी के नाम पर कंपनी बनाकर मुद्रण सामग्री की आपूर्ति की गई। 

इसके अलावा कुछ व्यक्तियों द्वारा एक ही समय में विषय विशेषज्ञ, समीक्षक और प्रूफरीडर की भूमिका निभाने के आरोप भी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

उधर, पीएमओ द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब सभी की नजरें स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग की रिपोर्ट और राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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