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ओडिशा में 300 KM का सफर और 'हाथी' जैसी बाधाएं, गजराज को 'एयरावत' ने दूर पहुंचाया

Published: Fri, 05 Jun 2026 08:12 PM (IST)

ओडिशा में वन विभाग ने तीन साल से आतंक मचा रहे एक उपद्रवी हाथी को 36 घंटे के चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा में मानव–वन्यजीव संघर्ष के बीच एक असाधारण और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन में वन विभाग ने लगभग तीन वर्षों से दहशत का पर्याय बने 40 वर्षीय उपद्रवी हाथी को अंततः सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने में सफलता हासिल की।

भारी विरोध और लगातार बदलते रूट के बीच यह पूरा अभियान लगभग 36 घंटे तक चला, जिसमें हाथी को करीब 300 किलोमीटर लंबे डिटूर के बाद मयूरभंज स्थित कंचिंदा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में सुरक्षित पहुंचाया गया।

सात मौतों से दहशत में थे इलाके

वन विभाग के अनुसार, यह उपद्रवी हाथी पिछले तीन वर्षों से अनुगुल और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था। इस दौरान सात लोगों की मौत के अलावा खेतों को भारी नुकसान और गांवों में लगातार भय का माहौल बना रहा। बढ़ते हमलों और स्थानीय आक्रोश के बाद विभाग ने हाथी को पकड़कर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

एयरावत वाहन से शुरू हुआ ऑपरेशन

विशेष वन्यजीव रेस्क्यू टीम ने हाथी को बेहोश कर ‘एयरावत’ नामक विशेष वाहन में सुरक्षित लोड किया और स्थानांतरण अभियान शुरू किया। पूरे ऑपरेशन के दौरान टीम ने लगातार हाथी की देखभाल की। गर्मी और तनाव से बचाने के लिए पानी का छिड़काव, निगरानी और आवश्यक भोजन की व्यवस्था की गई।

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सातकोसिया में विरोध से बदला पूरा प्लान

ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सातकोसिया क्षेत्र में सामने आई, जहां हाथी को छोड़ने की योजना का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि ग्रामीणों ने वन रेंज कार्यालय के गेट तक बंद कर दिए और हाथी को अपने इलाके में स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद विभाग को पूरा रूट बदलना पड़ा।

300 किलोमीटर का असामान्य सफर

विरोध के चलते हाथी का रूट कई बार बदला गया और यह अनुगुल से मयूरभंज तक एक लंबा चक्कर बन गया। निर्धारित मार्ग के बजाय हाथी को अनुगुल → केंदुझर → आनंदपुर → भद्रक → बालेश्वर → मयूरभंज (बारीपदा/बंगिरीपोसी क्षेत्र) से होकर ले जाया गया। पूरे रास्ते पुलिस और वन विभाग की टीम तैनात रही ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

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कंचिंदा सेंटर में सुरक्षित शिफ्ट

लंबे और तनावपूर्ण सफर के बाद हाथी को अंततः मयूरभंज के कंचिंदा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में सुरक्षित रूप से शिफ्ट किया गया। वहां पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर फिर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यह हाथी लंबे समय से जान-माल के लिए गंभीर खतरा बना हुआ था, इसलिए उसे किसी भी स्थानीय क्षेत्र में छोड़े जाने का विरोध किया गया। वहीं वन विभाग के सामने यह स्थिति मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती बनकर सामने आई।

यह घटना ओडिशा में वन्यजीव प्रबंधन की जटिलताओं को एक बार फिर उजागर करती है, जहां समाधान तक पहुंचना जितना जरूरी है, उतना ही कठिन भी।

अधिकारियों के बयान

अनुगुल के पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हाथी के व्यवहार में काफी बदलाव आए थे और वह लगातार तनावग्रस्त दिखाई दे रहा था। इसी कारण उसके आक्रामक होने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस सफल स्थानांतरण से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस कार्रवाई से भविष्य में मानव-हाथी संघर्ष में कमी आएगी तथा जान-माल के नुकसान पर रोक लगेगी।

इस बीच, डीएफओ नीतीश कुमार ने रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि “हाथी संकट में था। उसकी भलाई के लिए बुधवार सुबह 6.00 बजे बेहोश करने का अभियान शुरू किया गया। सभी टीमें मौके पर पहुंच चुकी थीं। सबसे पहले हाथी का पता लगाया गया। इसके बाद हमारी मानक प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करते हुए उसे बेहोश किया गया और ट्रक में लादा गया। जिसके बाद हमारे कर्मचारी उसे लेकर सुरक्षित स्थान के लिए रवाना हो गए।”

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