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पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ की 1.5 एकड़ 'अमृत मनोही' भूमि श्रीमंदिर को वापस मिलेगी, श्रीगुंडिचा मंदिर व शरधाबली के पास है जमीन

Published: Fri, 02 Oct 2026 01:40 PM (IST)

ओडिशा राजस्व बोर्ड ने पुरी में भगवान जगन्नाथ की 1.5 एकड़ 'अमृत मनोही' भूमि को वापस श्रीमंदिर के नाम दर्ज ...और पढ़ें

महाप्रभु जगन्नाथ की ‘अमृत मनोही’ भूमि वापस दर्ज करने का आदेश, 1.5 एकड़ जमीन फिर होगी श्रीमंदिर के नाम।

महाप्रभु जगन्नाथ की ‘अमृत मनोही’ भूमि वापस दर्ज करने का आदेश, 1.5 एकड़ जमीन फिर होगी श्रीमंदिर के नाम।

HighLights

  1. राजस्व बोर्ड ने जगन्नाथ की 1.5 एकड़ भूमि वापसी का आदेश दिया।

  2. 'अमृत मनोही' भूमि 2002 में निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित हुई थी।

  3. श्रीजगन्नाथ मंदिर अधिनियम 1955 का उल्लंघन कर हुआ था हस्तांतरण।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। पुरी में भगवान जगन्नाथ की भूमि संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में ओडिशा राजस्व बोर्ड ने श्रीगुंडिचा मंदिर और शरधाबली के निकट स्थित लगभग 1.5 एकड़ मूल्यवान ‘अमृत मनोही’ भूमि को पुनः महाप्रभु जगन्नाथ के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश पुरी के मौजा तालबनिया की भूमि से जुड़े दो मामलों में दिया गया, जिनमें भूमि की किस्म (किसम) बदलने और निजी स्वामित्व अधिकारों को मान्यता देने का दावा किया गया था। राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यव्रत साहू ने संबंधित अधिकारियों को भूमि अभिलेखों को पुनः भगवान जगन्नाथ के नाम बहाल करने का निर्देश दिया।

राजस्व बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, वर्ष 1889 के साबिक बंदोबस्त अभिलेखों में उक्त भूमि के स्वामी के रूप में भगवान जगन्नाथ दर्ज थे और भूमि की स्थिति ‘अमृत मनोही’ थी। हालांकि बाद के वर्षों में अभिलेखों में परिवर्तन हुआ और वर्ष 2002 में यह भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज हो गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बाद में पंजीकृत बिक्री विलेखों (रजिस्टर्ड सेल डीड) के माध्यम से भूमि अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित कर दी गई थी। मामले में श्रीजगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 की धारा 16(2) प्रमुख मुद्दा रही।

इस धारा के अनुसार मंदिर की अचल संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। सुनवाई के दौरान ऐसी किसी अनुमति का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका। राजस्व बोर्ड ने कहा कि यदि मूल हस्तांतरण की वैधता सिद्ध नहीं होती है, तो बाद में किए गए बिक्री विलेख अपने आप उसे वैध नहीं बना सकते।

बोर्ड ने बंदोबस्त अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भूमि को अभिलेखों में “श्री जगन्नाथ महाप्रभु बीजे, पुरी, मार्फत टेंपल मैनेजिंग कमेटी,अमृत मनोही के रूप में दर्ज किया जाए। सत्यव्रत साहू ने श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक को भी निर्देश दिया है कि लगभग 1.5 एकड़ भूमि को महाप्रभु जगन्नाथ के रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) में शामिल कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

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