पुरी का गुंडिचा मंदिर 6 साल बाद खुला, करें प्रभु श्री जगन्नाथ के मौसी बारी व जन्म वेदी के दर्शन; चर्चा में 'बाबेना भूत' भी
छह साल के लंबे इंतजार के बाद पुरी का ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए फिर से खुल गया है, ...और पढ़ें

छह साल के लंबे इंतजार के बाद पुरी का ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए फिर से खुल गया।
HighLights
छह साल बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर।
भक्त अब चतुर्धा मूर्ति के जन्म वेदी के दर्शन कर सकेंगे।
प्रवेश शुल्क 10 रुपये, कुछ श्रेणियों के लिए निःशुल्क दर्शन।
संवाद सूत्र, पुरी। छह साल के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को ऐतिहासिक गुंडिचा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। मंदिर खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को चतुर्धा मूर्ति के जन्म वेदी यानी आडप मंडप के दर्शन का अवसर मिला। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की प्रबंध समिति के निर्णय के अनुसार मंदिर में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को 10 रुपये का शुल्क देना होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूते-चप्पल और मोबाइल फोन जमा करने की निश्शुल्क व्यवस्था की गई है। दिव्यांगजन, बच्चे और 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को निश्शुल्क दर्शन की अनुमति दी जाएगी। मंदिर खुलने के पहले दिन श्रद्धालु, तीर्थयात्री और पर्यटक सिंहद्वार से मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। दर्शन के बाद निकासी की व्यवस्था भी इसी द्वार से की गई है।

''बाबेना भूत'' को लेकर भी चर्चा
गुंडिचा मंदिर स्थानीय मान्यताओं के कारण भी चर्चा में रहता है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि मंदिर में ''बाबेना भूत'' का वास है। मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए खुलने के बाद अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि दिन के समय भूत कहां रहता होगा और क्या रात में वापस मंदिर में लौटता है।
हालांकि यह स्थानीय लोकमान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंदिर खुलने के अवसर पर मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी, पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह, मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य, सेवायत और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

श्री गुंडीचा टेंपल का इस मंदिर की धार्मिक महत्व
यह मुख्य जगन्नाथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री गुंडीचा टेंपल (गुंडिचा मंदिर) ओडिशा के प्रसिद्ध तटीय शहर पुरी में स्थित है।
- भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर: इस मंदिर को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मौसी का घर माना जाता है। हर साल प्रसिद्ध 'रथ यात्रा' के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने मुख्य मंदिर से निकलकर इसी मंदिर में 7 से 9 दिनों के लिए विश्राम करने आते हैं।
- रथ यात्रा का गंतव्य: विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का समापन स्थल यही गुंडिचा मंदिर है। इस यात्रा के दौरान भगवान यहाँ राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा की इच्छा और भक्ति के सम्मान में निवास करते हैं।
- वास्तुकला: यह मंदिर पारंपरिक कलिंग वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो सुंदर बगीचों और प्राचीरों से घिरा हुआ है। पुराणों के अनुसार, इस स्थान को भगवान जगन्नाथ की जन्मवेदी या पवित्र स्थल भी माना जाता है।
- वर्षभर की स्थिति: वर्ष के अधिकांश समय यह मंदिर सूना रहता है, लेकिन रथ यात्रा के अवसर पर यहाँ भारी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
