ओडिशा में फिर शर्मसार हुई स्वास्थ्य व्यवस्था: सड़क के अभाव में 5 किमी भाड़ में ढोकर एंबुलेंस तक पहुंचाई गई गर्भवती
ओडिशा के रायगड़ा जिले में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को 5 किमी तक डोली में ढोकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री के वादों के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और बुनियादी ढांचे का अभाव बना हुआ है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। (AI Generated Image)
HighLights
रायगड़ा में गर्भवती को 5 किमी डोली में ढोया गया।
सड़क न होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
मुख्यमंत्री के वादों के बावजूद स्थिति जस की तस।
जासं, भुवनेश्वर। ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण आज भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
रायगड़ा जिले के पद्मपुर ब्लॉक स्थित नुआगड़ पंचायत के सात गांव से एक बार फिर व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली तस्वीर सामने आई है।
गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तक भाड़ (डोली) में ढोकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ा।
5 किलोमीटर का कठिन सफर
जानकारी के अनुसार, सात गांव निवासी एसो माझी की पत्नी रिबिका माझी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण वाहन रास्ते में ही रुक गया।
इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों, आशा कार्यकर्ता और ग्रामीणों ने मिलकर गर्भवती महिला को भाड़ पर लिटाया और कीचड़ व पथरीले रास्ते से होते हुए पांच किलोमीटर पैदल चलकर पाजिलिबंध गांव के पास खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया।
इसके बाद महिला को पद्मपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इस कठिन परिस्थिति में एंबुलेंस के तकनीशियन जसवंत नायक, पायलट विनोद कुमार साहुकार, अटेंडेंट प्रमोद जेना और आशा कार्यकर्ता सुमति माझी ने ग्रामीणों के साथ मिलकर महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15 दिनों में सामने आईं 5 घटनाएं
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सात गांव में लंबे समय से पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश के मौसम में स्थिति और विकराल हो जाती है, जिससे सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को होती है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 1 मई को रायगड़ा दौरे के दौरान घोषणा की थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जाएगा और जिले में किसी भी मरीज को भाड़ में ढोने की नौबत नहीं आने दी जाएगी।
इसके लिए 700 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान की घोषणा भी की गई थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति नहीं बदली है और पिछले 15 दिनों के भीतर केवल रायगड़ा जिले से ही इस तरह की पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं।