मिडल ईस्ट संकट की मार: ओडिशा का प्लास्टिक उद्योग पस्त, कच्चे माल की कमी से बंद होने की कगार पर कई फैक्ट्रियां
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण ओडिशा का प्लास्टिक उद्योग गंभीर संकट में है। खाड़ी देशों से कच्चे माल की आपूर्ति ...और पढ़ें

एआई से निर्मित तस्वीर।
HighLights
खाड़ी देशों से कच्चे माल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई।
श्रमिकों की आय घटी, रोजी-रोटी का संकट गहराया।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष की आग अब ओडिशा के औद्योगिक गलियारों तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों से होने वाली कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने के कारण राज्य का प्लास्टिक उद्योग संकट में है।
हालात इतने नाजुक हैं कि अधिकांश फैक्ट्रियों में उत्पादन 50 प्रतिशत से भी कम रह गया है। कई इकाइयां स्थायी रूप से बंद होने के कगार पर खड़ी हैं।
कच्चे माल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता
प्लास्टिक उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस सेक्टर में उपयोग होने वाले कच्चे माल का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आयात किया जाता है। मौजूदा वैश्विक संकट के कारण न केवल माल की आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने पॉलिमर आधारित रॉ मटेरियल की लागत को भी अनियंत्रित कर दिया है।
बालेश्वर की इकाइयों में पसरा सन्नाटा
ओडिशा के प्रमुख औद्योगिक केंद्र बालेश्वर में स्थित ‘वी मेक’ और ‘हरी प्लास्ट’ जैसी कंपनियां इस संकट का जीता-जागता उदाहरण हैं। 'वी मेक' के मालिक सोभेंद्र दास ने बताया कि उत्पादन लागत बढ़ने के कारण उन्हें अपनी 60 प्रतिशत मशीनें बंद करनी पड़ी हैं।
फिलहाल, वैकल्पिक तौर पर चीनी कच्चे माल के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। वहीं, 'हरी प्लास्ट' की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 12 मशीनों के बेड़े में से केवल एक मशीन चालू है।
कीमतों में भारी उछाल: एक नजर में
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूटने से प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है:
- कच्चा माल पुरानी कीमत (लगभग) नई कीमत (लगभग)
- पीवीसी (PVC) ₹75 / किलो ₹115 / किलो
- HDPE ₹91,000 / टन ₹1.61 लाख / टन
- MDP ₹95,000 / टन ₹1.80 लाख / टन
श्रमिकों पर आर्थिक संकट
उत्पादन ठप होने का सबसे बुरा असर यहां काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ा है। कर्मचारी संजीव परिडा के अनुसार, काम के घंटे घटने से मासिक आय में भारी कटौती हुई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
व्यापारी भी अनिश्चित कीमतों के कारण नया ऑर्डर देने से बच रहे हैं, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह भी कम हो गया है। 'हरी प्लास्ट' के प्रोडक्शन मैनेजर निरंजन महंत का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में ओडिशा का प्लास्टिक सेक्टर पूरी तरह 'शटडाउन' हो सकता है।
