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ओरांगुटान तस्करी मामले में एसटीएफ की जांच तेज, तीन राज्यों के पुलिस की ली जाएगी मदद

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:47 AM (IST)

बालेश्वर में बरामद पांच ओरांगुटानों की तस्करी के मामले में एसटीएफ ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए असम, मिजोरम और महाराष्ट्र पुलिस से सहयोग लेने का निर्णय लिया है।

ओरांगुटान तस्करी मामले में एसटीएफ की जांच तेज

ओरांगुटान तस्करी मामले में एसटीएफ की जांच तेज

HighLights

  1. एसटीएफ ने ओरांगुटान तस्करी की जांच तीन राज्यों तक बढ़ाई।

  2. असम, मिजोरम, महाराष्ट्र पुलिस से मदद लेकर गिरोह का पता लगाएगी।

  3. नंदनकानन में बरामद ओरांगुटानों के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ समिति की नजर।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बालेश्वर जिले के भोगराई स्थित रणकोठा आरक्षित वन से पांच ओरांगुटान बरामद होने के एक सप्ताह बाद भी उनकी कथित तस्करी के पीछे सक्रिय गिरोह का पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच कर रही एसटीएफ ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए असम, मिजोरम और महाराष्ट्र पुलिस से सहयोग लेने का निर्णय लिया है। 

वहीं, नंदनकानन में रखे गए पांचों ओरांगुटानों के स्वास्थ्य की विशेषज्ञ समिति लगातार निगरानी कर रही है।

पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित एक होटल को संदेह के घेरे में रखा गया 

पिछले 8 सितंबर को भोगराई ब्लॉक के रणकोठा आरक्षित झाऊ वन क्षेत्र में पांच ओरांगुटान मिलने के बाद पूरे देश में यह मामला चर्चा का विषय बन गया था। जांच में शुरू से ही एक काली एसयूवी और पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित एक होटल को संदेह के घेरे में रखा गया है। एसटीएफ को आशंका है कि इन्हीं माध्यमों से ओरांगुटानों को ओडिशा तक पहुंचाया गया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, दीघा के होटल मालिक जयंत मैती और उनके पुत्र संदीप मैती के इस कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना है। दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। 

पांच कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ

एसटीएफ ने होटल प्रबंधक और पांच कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। काली एसयूवी की गतिविधियों और उसके संभावित रूट की भी जांच की जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ अब अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के पहलुओं की जांच कर रही है। इसके लिए असम, मिजोरम और महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क किया जाएगा। 

अधिकारियों का मानना है कि इन राज्यों से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि ओरांगुटानों को भारत में कैसे लाया गया और उन्हें ओडिशा तक पहुंचाने के पीछे कौन लोग शामिल थे।

 मंगलवार को उनके स्वास्थ्य की समीक्षा 

उधर, नंदनकानन प्राणी उद्यान में रखे गए पांचों ओरांगुटानों की देखभाल के लिए गठित तकनीकी समिति ने मंगलवार को उनके स्वास्थ्य की समीक्षा की। नंदनकानन के निदेशक, उपनिदेशक और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में शावक ओरांगुटानों की सेहत और देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। समिति बुधवार को भी निरीक्षण जारी रखेगी और बाद में अपनी सिफारिशों सहित रिपोर्ट सौंपेगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। एसटीएफ, वन विभाग और अन्य एजेंसियां मिलकर इस बात का पता लगाने में जुटी है कि दुर्लभ प्रजाति के इन ओरांगुटानों को किस उद्देश्य से ओडिशा लाया गया था और इसके पीछे कौन सा अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है। फिलहाल तस्करी की यह गुत्थी जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।

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