ओडिशा के मरीज को चढ़ाया गलत ग्रुप का खून, तबीयत बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में एक ल्यूकेमिया पीड़ित महिला को कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाने का ...और पढ़ें

मरीज को अस्पताल ले जाते स्वजन। फोटो जागरण
HighLights
पुरी जिला अस्पताल में मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा।
गलत रक्त चढ़ाने से ल्यूकेमिया पीड़ित महिला की हालत गंभीर हुई।
स्वास्थ्य विभाग ने परिजनों की शिकायत पर मामले की जांच शुरू की।
शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के दौरान कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
ल्यूकेमिया से पीड़ित प्रदर्शिनी प्रधान नामक महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उन्हें गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई।
परिजनों के अनुसार, प्रदर्शिनी प्रधान लंबे समय से ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं। बीमारी के कारण उनका हीमोग्लोबिन और ब्लड काउंट लगातार कम हो रहा था। इसी वजह से उन्हें रक्त चढ़ाने के लिए पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मरीज के पुत्र मानस प्रधान ने बताया कि सात सितंबर को उनकी मां को एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया था। इसके बाद आठ और नौ सितंबर को भी रक्ताधान किया गया।
मानस प्रधान का आरोप है कि 11 सितंबर को रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान उन्हें पता चला कि ब्लड बैंक से बी-पॉजिटिव रक्त जारी किया गया है, जबकि उनकी मां का रक्त समूह ए-पॉजिटिव है।
उस समय वह अस्पताल में मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके पिता वहां थे। परिजनों ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा।
मरीज की बिगड़ी हालत
परिवार का आरोप है कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि यह गलती अस्पताल की नहीं, बल्कि ब्लड बैंक स्तर पर हुई है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
परिजनों का कहना है कि कथित तौर पर गलत रक्त चढ़ाए जाने के बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें खून की उल्टी हुई और स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार ने मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) से शिकायत की है। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
जांच में जुटा प्रशासन
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि मरीज को वास्तव में कौन-सा रक्त समूह जारी किया गया था, ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है तथा रक्त चढ़ाने से पहले निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग यह भी जांच कर रहा है कि रक्त जारी करने से लेकर मरीज को चढ़ाने तक की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई मानवीय भूल या तकनीकी चूक तो नहीं हुई।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिजनों के आरोप कितने सही हैं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल मरीज की स्थिति पर परिजनों की नजर बनी हुई है और वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
