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'अगर भरोसा खत्म हो जाए तो शादी नहीं टिक सकती', तलाक केस में ओडिशा HC की अहम टिप्पणी; पति की याचिका खारिज

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:39 AM (IST)

उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रायगड़ा परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है।

ओडिशा हाई कोर्ट। फाइल फोटो

ओडिशा हाई कोर्ट। फाइल फोटो

HighLights

  1. उड़ीसा हाईकोर्ट ने रायगड़ा परिवार न्यायालय के तलाक आदेश को बरकरार रखा।

  2. अदालत ने विवाह को पारस्परिक सम्मान और विश्वास पर आधारित बताया।

  3. पति की अपील खारिज, वैवाहिक संबंधों की बुनियाद टूटने पर टिप्पणी।

जागरण संवाददाता, कटक। विवाह केवल एक कानूनी बंधन नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान, विश्वास और साझेदारी की भावना पर आधारित एक पवित्र संबंध है। यदि इन मूल तत्वों का पूरी तरह क्षरण हो जाए तो केवल कानूनी रूप से विवाह को बनाए रखने से उसकी पवित्रता सुरक्षित नहीं रह सकती। उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह टिप्पणी करते हुए रायगड़ा परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरिश टंडन और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि अदालतों का दायित्व विवाह संस्था की रक्षा करना है, लेकिन जब वैवाहिक संबंध की बुनियाद ही पूरी तरह टूट चुकी हो, तब केवल औपचारिक और कानूनी अस्तित्व बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह की पवित्रता केवल उसके कानूनी स्वरूप को बनाए रखने से नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच मौजूद विश्वास, सम्मान और साथ निभाने की भावना से कायम रहती है।

पत्नी ने दायर की थी तलाक की याचिका

मामले के अनुसार, पति और पत्नी का विवाह 20 अक्टूबर 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दोनों सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में कार्यरत थे।

विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे और दांपत्य जीवन में तनाव पैदा हो गया। वर्ष 2023 में पत्नी पति का घर छोड़कर अलग रहने लगी।

पत्नी ने आरोप लगाया कि उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उसके लिए वैवाहिक जीवन जारी रखना संभव नहीं रहा।

इसके बाद पत्नी ने रायगड़ा परिवार न्यायालय में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा पाया कि वैवाहिक संबंध सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना नहीं है। इसके बाद 27 जनवरी 2024 को परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश पारित कर दिया।

पति ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती 

परिवार न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए पति ने उड़ीसा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपील में पति ने तलाक के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद परिवार न्यायालय के निष्कर्षों से सहमति जताई और अपील को खारिज कर दिया।

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि विवाह संस्था समाज की महत्वपूर्ण इकाई है और अदालतें यथासंभव संबंधों को बचाने का प्रयास करती हैं, लेकिन जब पति-पत्नी के बीच विश्वास समाप्त हो जाए, संबंधों में लगातार कटुता बनी रहे और साथ रहने की संभावना लगभग खत्म हो जाए, तब केवल कानूनी बंधन बनाए रखना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। ऐसे मामलों में विवाह विच्छेद ही उचित समाधान हो सकता है।

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को विवाह संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने वैवाहिक संबंधों की वास्तविक स्थिति और मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता देते हुए फैसला सुनाया है।

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