ओडिशा में बढ़ रहा सूखे का खतरा, मौसम वैज्ञानिकों की स्टडी में डराने वाले तथ्य आए सामने
जलवायु परिवर्तन के कारण ओडिशा में सूखे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, एक वैज्ञानिक अध्ययन ने राज्य को ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
ओडिशा 'ड्रॉट हॉटस्पॉट' के रूप में चिह्नित, सूखे का खतरा बढ़ा।
वैज्ञानिक अध्ययन ने 52 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया।
जल संरक्षण, सूखा-रोधी कृषि जैसे उपाय समय की जरूरत।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। जलवायु परिवर्तन का असर अब ओडिशा में नए रूप में सामने आ रहा है। चक्रवात और बाढ़ के लिए पहचाने जाने वाले राज्य में अब सूखे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में ओडिशा को देश के प्रमुख ‘ड्रॉट हॉटस्पॉट’ (सूखा प्रभावित क्षेत्र) के रूप में चिह्नित किया गया है।
अध्ययन में कहा गया है कि पूर्वी तट पर बढ़ते हीट स्ट्रेस और लंबे समय तक शुष्क मौसम की स्थिति के कारण राज्य में सूखे की तीव्रता लगातार बढ़ रही है।
1971 से 2022 तक का डाटा खंगाला
‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन को भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) और बेंगलुरु स्थित एट्रिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है। इसके लिए वर्ष 1971 से 2022 तक के 52 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में अधिकतम और न्यूनतम तापमान, सूखे की स्थिति, अत्यधिक वर्षा, हीटवेव और गर्मीजनित दबाव समेत सात प्रमुख संकेतकों को आधार बनाकर ‘इंडिया क्लाइमेट एक्सट्रीम इंडेक्स’ तैयार किया गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार बढ़ते तापमान, लंबे समय तक शुष्क मौसम और लगातार बिगड़ती सूखे की परिस्थितियों के कारण देश में जलवायु संबंधी चरम घटनाएं अधिक गंभीर होती जा रही हैं।
पुराने डाटा का हुआ विश्लेषण
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1981-1991 की तुलना में 2011-2021 के दौरान पूर्वी भारत में गंभीर सूखे की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दक्षिण, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बार-बार सूखे की स्थिति देखी गई, लेकिन सबसे अधिक संकटग्रस्त क्षेत्र पूर्वी तटीय इलाकों को पाया गया। इनमें ओडिशा प्रमुख रूप से शामिल है।
अध्ययन के अनुसार, पिछले तीन दशकों में प्रत्येक दशक के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्र का दायरा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। ओडिशा में तटीय क्षेत्रों से लेकर आंतरिक जिलों तक हीट स्ट्रेस का प्रभाव महसूस किया जा रहा है।
तापमान और उमस के संयुक्त प्रभाव को दर्शाने वाला हीट इंडेक्स भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
चुनौती को सीरियस लेने की जरूरत
अध्ययन के सह-लेखक और पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव एम. राजीवन ने कहा कि ओडिशा को इस चेतावनी को गंभीरता से लेने की जरूरत है। अब तक राज्य चक्रवात और बाढ़ जैसी आपदाओं से जूझता रहा है, लेकिन दीर्घकालिक आंकड़े बताते हैं कि सूखा भी एक बड़ी जलवायु चुनौती बनकर उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, सूखा-रोधी कृषि, बेहतर जल प्रबंधन और हीट एक्शन प्लान को मजबूत करना समय की जरूरत है।वैज्ञानिकों ने जिला स्तर पर जलवायु जोखिमों के आकलन और निगरानी प्रणाली विकसित करने की भी सिफारिश की है, ताकि भविष्य में सूखे जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
