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ओडिशा DGP नियुक्ति का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जूनियर अफसर को रेस में लाने का आरोप; 12 अगस्त को सुनवाई

Published: Tue, 11 Aug 2026 10:05 PM (IST)

ओडिशा के अगले डीजीपी की नियुक्ति का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जहां राज्य सरकार द्वारा यूपीएससी को भेजे गए पैनल को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट।

सुप्रीम कोर्ट।

HighLights

  1. डीजीपी नियुक्ति विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 12 अगस्त को सुनवाई।

  2. राज्य सरकार पर जूनियर अधिकारी को शामिल करने का आरोप।

  3. प्रकाश सिंह मामले के दिशानिर्देशों का उल्लंघन का दावा।

संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल(ओडिशा)। ओडिशा के अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

एक जनहित याचिका (पीआईएल) में राज्य सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे गए आईपीएस अधिकारियों के पैनल और उसके बाद की चयन प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में निर्धारित डीजीपी चयन प्रक्रिया को दरकिनार कर एक अपेक्षाकृत जूनियर अधिकारी को दौड़ में शामिल करने की कोशिश कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई पर सहमति जताई है। सुनवाई बुधवार, 12 अगस्त को होने की संभावना है।

7 अगस्त को यूपीएससी में होनी थी छंटनी

वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि ओडिशा सरकार ने डीजीपी चयन के लिए पहले यूपीएससी को अधिकारियों की सूची भेजी थी।

यूपीएससी की एम्पैनलमेंट कमेटी को सात अगस्त को इस सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल तैयार करना था। लेकिन राज्य सरकार ने सूची वापस ले ली। इसके बाद नए पैनल की कवायद शुरू हुई।

याचिकाकर्ता के अनुसार, पहले भेजी गई सूची में तीन डीजी रैंक के अधिकारी और आठ एडीजी रैंक के अधिकारी थे। आरोप है कि यूपीएससी ने संकेत दिया था कि निर्धारित पात्रता के आधार पर ही अधिकारियों पर विचार किया जाएगा।

एडीजी को डीजी बनाकर पैनल में लाने का आरोप

मामले में सबसे अहम आरोप यह है कि राज्य सरकार ने दो एडीजी स्तर के अधिकारियों संजीव पंडा और वाईके जेठवा को 10 अगस्त को डीजी रैंक पर पदोन्नत कर दिया।

राज्य सरकार की ओर से जारी सूचना के अनुसार दोनों 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें तत्काल प्रभाव से डीजी ऑफ पुलिस के ग्रेड में पदोन्नत किया गया है। पंडा एंटी-नक्सल ऑपरेशन इकाई के प्रमुख और जेठवा राज्य सतर्कता निदेशक हैं।

सीजेआई बोले....यूपीएससी अपने फैसले का पालन करे

दलीलों के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने यूपीएससी की भूमिका पर स्पष्ट टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यूपीएससी पात्रता मानदंड और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से परिचित है तथा उससे अदालत के फैसले के अनुरूप कार्रवाई की अपेक्षा है।

इसका अर्थ यह है कि राज्य सरकार द्वारा भेजे जाने वाले पैनल पर अंतिम विचार करते समय यूपीएससी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पात्रता और प्रक्रिया को ध्यान में रखना होगा।

क्या है प्रकाश सिंह मामला?

विवाद का आधार सुप्रीम कोर्ट का 2006 का ऐतिहासिक प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसला है। पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह ने पुलिस सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसी मामले में अदालत ने राज्यों में पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक और बाहरी दबाव से मुक्त करने तथा पुलिस प्रमुख की नियुक्ति समेत कई सुधारों के निर्देश दिए थे।

डीजीपी नियुक्ति की व्यवस्था के तहत यूपीएससी को पात्र वरिष्ठ अधिकारियों में से पैनल तैयार करना होता है और राज्य सरकार को उसी पैनल में से पुलिस प्रमुख नियुक्त करना होता है। बाद के आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया और पात्रता संबंधी शर्तों को और स्पष्ट किया है।

पहले तीन डीजी अधिकारियों के नाम थे

जुलाई में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार ओडिशा सरकार ने यूपीएससी को 11 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजे थे। इनमें तीन डीजी रैंक के अधिकारी सुधांशु सडंगी, आरपी कोचे और सुसांत कुमार नाथ शामिल बताए गए थे। यूपीएससी की एम्पैनलमेंट कमेटी को इनमें से पात्र अधिकारियों के आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार करना था।

7 अगस्त की बैठक में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद राज्य की ओर से सूची वापस लिए जाने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया।

पंडा-जेठवा की पदोन्नति से घटनाक्रम ने लिया नया मोड़

10 अगस्त को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी के बाद 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीब पंडा और वाईके जेठवा को डीजी रैंक पर पदोन्नत किया गया। दोनों पहले एडीजी स्तर पर कार्यरत थे। पदोन्नति ऐसे समय हुई है जब नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया पहले ही विवादों में आ चुकी है।

खुरानिया के बाद नए पुलिस प्रमुख की तलाश

ओडिशा के मौजूदा डीजीपी वाईबी खुरानिया 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। ओडिशा गृह विभाग की अधिसूचना के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार उन्हें 16 अगस्त 2026 की अपराह्न से सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई है।

इसी वजह से राज्य में नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया तेज की गई थी। यूपीएससी की सात अगस्त वाली बैठक का उद्देश्य तीन नामों का पैनल तैयार करना था, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब सुप्रीम कोर्ट में उठे सवालों के कारण नियुक्ति प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी की नजर भी पड़ गई है।

अब अदालत में तय होगा प्रक्रिया का अगला रास्ता

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी नियुक्ति पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए अथवा प्रस्तावित पैनल में शामिल अधिकारियों की पात्रता और चयन प्रक्रिया प्रकाश सिंह मामले में निर्धारित न्यायिक मानदंडों के अनुरूप है या नहीं।

12 अगस्त की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी कि इससे स्पष्ट हो सकता है कि यूपीएससी को पहले भेजे गए पैनल, उसे वापस लेने और नए अधिकारियों को संभावित सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पर अदालत क्या दिशा-निर्देश देती है।

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