Odisha Weather Update: ओडिशा पर मंडरा रहा चक्रवाती तूफान का खतरा, 23 अक्टूबर को बन सकता है कम दबाव का क्षेत्र
बंगाल की खाड़ी में एक संभावित चक्रवाती सिस्टम को लेकर हलचल तेज हो गई है, जिससे ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों पर खतरा मंडरा रहा है।

ओडिशा का मौसम (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती सिस्टम की हलचल तेज।
23 अक्टूबर के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की उम्मीद।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश तट पर चक्रवाती तूफान का खतरा।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में एक संभावित चक्रवाती सिस्टम को लेकर हलचल तेज हो गई है। कुछ विदेशी मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान में इसके विकसित होकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, अभी चक्रवाती तूफान बनने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके संभावित मार्ग, तीव्रता और तट से टकराने के स्थान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में मौसम प्रणाली की गतिविधियों पर अगले दो दिनों तक विशेष नजर रखी जाएगी।
मौसम संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में उत्तरी तमिलनाडु तट के पास ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से 23 अक्टूबर के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होकर मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ सकता है।
आंध्र प्रदेश में बारिश की संभावना
संभावित मौसम प्रणाली के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अगले तीन दिनों तक बारिश होने का अनुमान है। तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि अन्य इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान के मुताबिक, 27 अक्टूबर तक यह सिस्टम अवदाब में तब्दील हो सकता है।
ओडिशा के तटीय इलाकों पर नजर
कुछ विदेशी मौसम एजेंसियों ने आशंका जताई है कि अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर यह सिस्टम चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। ऐसी स्थिति में अक्टूबर के अंतिम दिनों में उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के बीच इसके तट से टकराने की संभावना जताई गई है। हालांकि, यह अभी प्रारंभिक अनुमान है। सिस्टम की दिशा और तीव्रता में बदलाव होने पर इसका संभावित मार्ग भी बदल सकता है।
फिलहाल चक्रवात बनने या उसके ओडिशा तट से टकराने की पुष्टि नहीं हुई है। अगले दो दिनों में सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद इसकी संभावित दिशा और प्रभाव को लेकर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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