ओडिशा में 5 ओरांगुटान मिलने पर एक्शन में CM माझी, अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर नेटवर्क खंगाल रही STF
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बालेश्वर में पांच शिशु ओरांगुटान की बरामदगी को गंभीरता से लिया है और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

ओडिशा में 5 ओरांगुटान मिलने पर एक्शन में CM माझी
HighLights
मुख्यमंत्री माझी ने ओरांगुटान बरामदगी की विस्तृत जांच के दिए आदेश।
एसटीएफ बालेश्वर और दीघा में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की कर रही छानबीन।
ओडिशा को वन्यजीव तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं बनने दिया जाएगा।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बालेश्वर जिले से पांच शिशु ओरांगुटान के बरामद होने के मामले को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश देते हुए कहा है कि ओडिशा को विदेशी और दुर्लभ वन्यजीवों की अवैध तस्करी का ट्रांजिट रूट किसी भी कीमत पर नहीं बनने दिया जाएगा।
दुबई दौरे पर गए मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के माध्यम से जांच एजेंसियों को तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।
ओरांगुटान किस रास्ते से ओडिशा पहुंचे
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से यह जानने को कहा है कि पांचों ओरांगुटान किस रास्ते से ओडिशा पहुंचे, उन्हें यहां लाने के पीछे किसका हाथ है और उनका अंतिम गंतव्य क्या था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या अंतरराज्यीय अथवा अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने मामले की जांच और तेज कर दी है। एसटीएफ की दो टीमें बालेश्वर और पश्चिम बंगाल के दीघा से सटे क्षेत्रों में छानबीन कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ओरांगुटानों को भोगराई क्षेत्र के रास्ते ओडिशा में प्रवेश कराया गया हो सकता है। जांच एजेंसियां सीमा से जुड़े मार्गों, संदिग्ध वाहनों और तस्करों के संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
अन्य मामलों से भी जोड़ रही पुलिस
सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ इस मामले को देश के अन्य राज्यों में सामने आए ओरांगुटान तस्करी के मामलों से जोड़कर भी देख रही है। मणिपुर और महाराष्ट्र में पहले दर्ज मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। मणिपुर के एक मामले में वन्यजीव तस्कर की गिरफ्तारी हुई थी, जहां जांच में ओरांगुटान को म्यांमार से लाए जाने की बात सामने आई थी। इसी कारण जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), केंद्रीय एजेंसियों तथा अन्य प्रवर्तन संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। साथ ही बरामद किए गए पांचों शिशु ओरांगुटानों की सुरक्षा, चिकित्सकीय देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करने को कहा है।
दुनिया के सबसे दुर्लभ और संरक्षित प्राइमेट्स
गौरतलब है कि ओरांगुटान दुनिया के सबसे दुर्लभ और संरक्षित प्राइमेट्स में शामिल हैं तथा मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों में पाए जाते हैं। ऐसे में ओडिशा में पांच शिशु ओरांगुटानों का एक साथ बरामद होना वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले का खुलासा होने पर विदेशी वन्यजीवों की अवैध तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
ओरांगुटान दुनिया के सबसे बुद्धिमान प्राइमेट्स (वानर) में से एक हैं। इन्हें एशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का “वन मानव” भी कहा जाता है। मलय भाषा में Orang का अर्थ “मनुष्य” और Hutan का अर्थ “जंगल” होता है।
ओडिशा के बालेश्वर में हाल ही में बरामद किए गए शिशु ओरांगुटान संभवतः अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े मामले का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि भारत ओरांगुटान का प्राकृतिक आवास नहीं है।
यह भी पढ़ें- नंदनकानन जू में 5 ओरंगुटान बने खास मेहमान, मैसूर जू की सलाह पर बना विशेष डाइट चार्ट; खिलौनों से बहलाया जा रहा मन
यह भी पढ़ें- मां से इमोशनल अटैचमेंट, बचपन में सीखते बिस्तर लगाना और इलाज करना; चौंका देगी Orangutans की लाइफ!
