मां से इमोशनल अटैचमेंट, बचपन में सीखते बिस्तर लगाना और इलाज करना; चौंका देगी Orangutans की लाइफ!
What is Orangutan: ओडिशा के बालासोर जंगल में 5 ओरंगुटान बच्चे मिलने से हड़कंप मच गया है, जिन्हें अब भुवनेश्वर ...और पढ़ें

ओडिशा के जंगलों में ओरंगुटान के 5 बच्चे मिले हैं।
HighLights
ओडिशा के बालासोर जंगल में 5 दुर्लभ ओरंगुटान बच्चे मिले।
नंदनकानन जू में विशेष देखभाल और निगरानी में रखे गए।
भारत में इनकी मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का संकेत।
डिजिटल डेस्क, भुवनेश्वर। इंसानों जैसा DNA, बच्चों जैसी मासूमियत और ब्लैक मार्केट (अंतरराष्ट्रीय बाजार) में करीब 20 से 25 लाख रुपये तक की कीमत! दुनिया के सबसे दुर्लभ जीवों में शुमार 'ओरंगुटान' इन दिनों ओडिशा में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
दरअसल, 8 सितंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के जंगलों में विदेशी बंदर 'ओरंगुटान' (वनमानुष) के 5 बच्चे मिले।
स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दी। जिसके बाद प्रशासन ने इन बच्चों को इलाज और देखभाल के लिए भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया। यहां इन्हें क्वारंटीन करके रखा गया है और 24 घंटे निगरानी भी हो रही है।

आपको बता दें कि ओरंगुटान बंदर भारत में नहीं पाए जाते हैं। इनका भारत में मिलना काफी हैरान करने वाला है। इसे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन होते हैं ओरंगुटान?
ओरंगुटान को 'वनमानुष' भी कहा जाता है। दुनिया में ये केवल दक्षिण-पूर्व एशिया के दो द्वीपों के वर्षावनों में पाए जाते हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया और ब्रुनेई के बीच बंटा द्वीप 'बोरनियो' और इंडोनेशिया का द्वीप 'सुमात्रा' ही इनके एकमात्र ठिकाने हैं।

कैसे दिखते हैं?
इनके शरीर पर लाल और भूरे लंबे बाल होते हैं। इनके हाथ भी इनकी टांगों से ज्यादा लंबे और मजबूत होते हैं।
ओरंगुटान की कितनी प्रजातियां होती हैं?
ओरंगुटान की मुख्य रूप से 3 प्रजातियां हैं। बोरनियन, सुमात्रन और तपानुलि ओरंगुटान। ये तीनों ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में हैं।

इंसानों से मिलता-जुलता होता है इनका DNA
अमेरिकी सरकार की स्वास्थ्य एजेंसी National Institutes of Health और Genome.gov की रिचर्स रिपोर्ट के अनुसार चिम्पांजी (99%) के बाद ओरंगुटान ही इंसानों के सबसे करीबी महान वानरों (Great Apes) में शामिल हैं। ओरंगुटान का लगभग 97% डीएनए (Orangutan DNA) इंसानों से मिलता-जुलता है।
इंसानों की तरह होते हैं इमोशनल!
इनकी कुछ-कुछ हरकतें भी इंसानों जैसी ही होती हैं। NIH की रिपोर्ट के अनुसार, 97% DNA समानता के कारण ओरंगुटान इंसानों की तरह हाथ से औजार बनाना, अपने बच्चों को सालों तक ट्रेनिंग देना, इमोशन्स जाहिर करना और समस्याओं को सुलझाना जानते हैं।
मां से होता है खास अटैचमेंट
दुनिया में इंसानों के बाद ओरंगुटान ही एक ऐसा जीव है जिसकी मां अपने बच्चे को सबसे ज्यादा समय (लगभग 7 से 9 साल) तक संभालती है और उसे जीवन जीने के सारे गुर सिखाती है।
खुद ही कर लेते हैं खुद का इलाज
साइंटिफिक रिसर्च में यह भी पाया गया है कि ओरंगुटान बीमार या घायल होने पर औषधीय जड़ी-बूटियों और औषधीय पेड़-पौधों की पत्तियों को चबाकर अपने जख्मों पर लेप की तरह लगाते हैं।
अपना बिस्तर भी खुद बनाते हैं ओरंगुटान
ओरंगुटान इंसानों की तरह ही कई काम करते हैं। जंगलों में ये पेड़ों की ऊंची डालियों पर हर दिन सोने के लिए टहनियों और पत्तियों का नया घोंसला बनाते हैं।
इनमें इतनी समझ होती है कि ये अपने सोने के लिए पत्तियों से ही गद्दा और तकिया तक बना लेते हैं। ये अपने बिस्तर को पूरी तरह से सेट करके ही सोते हैं।

बहरहाल, इन सभी जानकारियों के बाद आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि ओडिशा में मिले इस वानर के बच्चों के लिए यह कितना कठिन समय है। वह इतने छोटे हैं कि उन्हें यह समझ भी नहीं होगी कि वह अपनी मां से कितनी दूर हैं।
ओडिशा का वन विभाग उनकी देखभाल में लगा हुआ है। इससे संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि ये बच्चे हमेशा खुशहाली वाले माहौल में फलें-फूलें और वसुधैव कुटुम्बकम् की विचारधारा वाले भारत में अपनी जगह बना पाएं।
Source:
- समाचार एजेंसी: PTI
- नेचर जर्नल: यह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख साप्ताहिक वैज्ञानिक पत्रिकाओं में से एक है।
- Genome.gov: यह National Human Genome Research Institute (NHGRI) की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट है। NHGRI अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) का एक हिस्सा है
- अमरीकी स्वास्थ्य संस्थान: NIH (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ)
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