भुवनेश्वर, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश की विधानसभा के तर्ज पर ओडिशा विधानसभा का डिजिटलाइजेशन कर इसे हाईटेक बनाया का प्रयास किया जाएगा। छह महीने के अंदर ओडिशा विधानसभा को पेपरलेस करने, व्यर्थ के खर्चों को कम करने की आशा है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा पूर्ण रूप से डिजिटल हो गई है जहां प्रत्येक विधायक की सीट के पास कंप्यूटर उपलब्ध है। वहां पूरे विधानसभा परिसर में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है।

देश की पहली ई-विधानसभा बनने की मान्यता हिमाचल विधानसभा को प्राप्त हुई है। कुछ दिनों पहले विधानसभा अध्यक्ष सूर्यनारायण पात्र की अध्यक्षता में एक कमेटी ने शिमला जाकर वहां की विधानसभा का अवलोकन किया था। ओडिशा विधानसभा के डिजिटलाइजेशन के लिए प्रचलित सुविधाओं में आमूल-चूल परिवर्तन किया जाएगा। इसके तहत विधायकों की सीट के सामने कंप्यूटर लगाए जाएंगे जिसमें सभी प्रश्न-उत्तर, नोटिस एवं अन्य प्रॉसिडिंग का ऑनलाइन डिसप्ले किया जाएगा। विधायकों के लिए एक स्वतंत्र एप बनाया जाएगा। इसमें कमेटी बैठक की तारीख के साथ विधानसभा के सभी तथ्य उपलब्ध रहेंगे। अधिवेशन से विधायकों को विधानसभा आकर प्रश्न दाखिल करने की जरुरत नही रहेगी, वे एप के माध्यम से ही अपने प्रश्न भेज सकेंगे। 

सभापति सूर्यनारायण पात्र के अनुसार, छह महीने में यह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। ओडिशा विधानसभा राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन में शामिल हो गई है जिसके अंतर्गत बिल, लिस्ट ऑफ बिजनेस, कमेटी, सदस्य, प्रश्न उत्तर आदि विषय के बारे में जानकारी सहज ही उपलब्ध होगी। डिजिटल युग में ओडिशा विधानसभा को पेपरलेस करने पर विचार किया जा रहा है जो एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि कुछ विधायकों ने इस कदम का विरोध किया है। उनका मानना है जो विधायक टेक्नोलॉजी के अभ्यस्त नहीं है, उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ेगा। इसके समाधान के लिए विधायकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण पर आलोचना की गई। वही ई-विधानसभा को सही रूप से कार्यकारी करने के लिए बैठक भी की जाएगी। 

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Posted By: Babita kashyap

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