विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य बना ओडिशा, चीनी और प्याज की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:37 AM (IST)

ओडिशा देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य बन गया है, जहां अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 5.5% तक पहुंच गई, जो ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. ओडिशा में अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 5.5% दर्ज की गई।

  2. राज्य देश का पांचवां सबसे महंगा बाजार बन गया है।

  3. चीनी और प्याज की कीमतों में वृद्धि मुख्य चिंता का विषय।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा देश के सबसे महंगे बाजारों में शामिल हो गया है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण राज्य की खुदरा मुद्रास्फीति (रिटेल इन्फ्लेशन) अगस्त महीने में बढ़कर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत 4.28 प्रतिशत से 1.24 प्रतिशत अधिक है। तेलंगाना (6.27%), तमिलनाडु (5.92%), मध्य प्रदेश (5.55%) और आंध्र प्रदेश (5.53%) के बाद ओडिशा देश का पांचवां सबसे महंगा बाजार बन गया है।

इसका अर्थ है कि देश के औसत उपभोक्ताओं की तुलना में ओडिशा के लोगों को विभिन्न वस्तुएं अधिक कीमत देकर खरीदनी पड़ रही हैं। जुलाई में राज्य की खुदरा मुद्रास्फीति 4.83 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई। यानी एक महीने में इसमें 0.69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

जनवरी 2026 के बाद से राज्य की मुद्रास्फीति में 2.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है, जो देश में सबसे अधिक है। जनवरी में ओडिशा की खुदरा मुद्रास्फीति दर 2.95 प्रतिशत थी।

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति 5.90 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.47 प्रतिशत रही। जुलाई में यह दर क्रमशः 5.12 प्रतिशत और 4.02 प्रतिशत थी।

देश के बड़े राज्यों में ग्रामीण मुद्रास्फीति के मामले में तेलंगाना (6.79%) और तमिलनाडु (6.10%) के बाद ओडिशा तीसरे स्थान पर है। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव सबसे अधिक पड़ रहा है।

चीनी और प्याज की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक को केंद्र सरकार ने मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है, लेकिन चीनी, सब्जियों और प्याज की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई निर्धारित सीमा से ऊपर पहुंच गई है।

पिछले महीने राज्य में चीनी की कीमत कुछ ही दिनों में 42 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। बाद में केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक सीमा तय करने और 10 लाख टन चीनी के शुल्कमुक्त आयात की अनुमति देने के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन अब भी चीनी के दाम सामान्य स्तर से काफी ऊपर बने हुए हैं।

इसी तरह प्याज की कीमत 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है और इसमें गिरावट नहीं आ रही है। अगस्त में शुरू हुई यह तेजी सितंबर में भी जारी है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि सितंबर में राज्य की खुदरा मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है।

अगस्त में चांदी के आभूषण, अदरक, प्याज, लहसुन, सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषणों की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं टमाटर, आलू, कार और जीप, भिंडी तथा कुंदरू के दामों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

बाढ़ और आपूर्ति बाधित होने से बढ़ी महंगाई

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रभास मिश्रा के अनुसार, लगातार बारिश और बाढ़ की स्थिति राज्य में महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का असर शहरी आपूर्ति श्रृंखला पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।

इसी वजह से अगस्त में ओडिशा की ग्रामीण मुद्रास्फीति अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक रही। डॉ. मिश्रा ने कहा कि चीनी और प्याज की कीमतों में तेज वृद्धि ने भी महंगाई के दबाव को और बढ़ाने का काम किया है।

यह भी पढ़ें- ओडिशा की गेंगूती नदी में हादसा: नहाने के दौरान बहे बुजुर्ग दंपती, 14 किमी दूर सुरक्षित मिली महिला, पति लापता