बालेश्वर, लावा पांडे। भारत की विभिन्न मिसाइलें उसकी सुरक्षा प्रणाली का बेहद अहम हिस्सा है। इसमें कई जमीन से जमीन तक मार करने वाली मिसाइलें हैं तो कई जमीन से हवा में मार करने वाली तो कई समुद्र में से दागी जा सकने वाली मिसाइलें हैं। अग्नि मिसाइल है भारतीय मिसाइल प्रणाली की मुख्य रीढ़ हैं। 

मिसाइलें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं बैलेस्टिक मिसाइल तथा क्रूज मिसाइल। कई मिसाइलें जमीन से जमीन तो कई जमीन से हवा तो कई हवा से हवा तो कई हवा से जमीन पर प्रहार कर सकती हैं। यह सभी मिसाइलें भारतीय मिसाइल बेड़े में मौजूद हैं। कम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल है जैसे पृथ्वी एक दो और तीन तथा प्रहार मिसाइल।

इसी तरह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि एक और अग्नि दो इंटरमीडिएट दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि 3 और अग्नि 4 तथा अंतर महाद्वीपीय दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 शामिल है। इसी तरह पनडुब्बी बैलेस्टिक मिसाइल के 15 सामरिक मिसाइल शौर्य मिसाइल और प्रहार मिसाइल है। क्रूज़ मिसाइलों में ब्रम्होस एक मिसाइल तथा ब्रह्मोस 2 मिसाइल तथा निर्भय मिसाइल शामिल हैं। इसी तरह टैंक भेदी मिसाइल नाग भी भारत के पास मौजूद है। अपनी सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करने और सेना को ताकतवर बनाने की दिशा में देश ने एक और कदम बढ़ा दिया है। 

बीते वर्ष सन् 2019 में भारत ने करीब दो दर्जन से ज्यादा विभिन्न मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया इस वर्ष सबसे जो खास बात रही वही की दिन की अपार मिसाइलों के सफल परीक्षण के बाद रात के वक्त भी भारी भरकम मिसाइलों से लेकर छोटे मिसाइलों का सफलतापूर्वक भारतीय वैज्ञानिकों ने परीक्षण कर मानो एक मिसाल पेश कर दिया है। आज भारत के पास सभी प्रकार की मिसाइलें मौजूद हैं।

कुछ मिसाइलें स्वदेश निर्मित हैं तो कई मिसाइलें दूसरे देशों के साथ मिलकर भी बनाई गई है। यदि आज यह कहा जाए कि 2019 भारत के लिए मिसाइलों का परीक्षण का वर्ष रहा तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी। आने वाला कोई भी युद्ध अब यदि लड़ा जाएगा तो शायद युद्ध की शुरुआत मिसाइलों से ही किया जाएगा। विश्व का कोई भी देश चाहे कितना भी ताकतवर क्यों ना हो वह आज अपने मिसाइल बनाने और इसका परीक्षण करने से पीछे नहीं हट रहा है।

 सन 2019 में किए गए विभिन्न मिसाइलों के परीक्षण इस प्रकार हैं 

  • मार्च के महीने से लेकर दिसंबर के महीने में सुबह और रात को किए गए सफल परीक्षण 27 मार्च को स्वदेशी इंटरसेप्टर का परीक्षण
  •  30 सितंबर को ब्रह्मोस का परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर
  •  17 नवंबर को अग्नि दो का रात के वक्त परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 2000 किलोमीटर से ज्यादा
  •  21 नवंबर को पृथ्वी दो का रात के समय परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर 
  • 1 दिसंबर को अग्नि 3 मिसाइल का रात को परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर
  •  4 दिसंबर को पृथ्वी दो मिसाइल का परीक्षण 
  • 17 दिसंबर को ब्रह्मोस का परीक्षण
  •  19 दिसंबर को पिनाका रॉकेट का परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 70 किलोमीटर
  •  23 दिसंबर को क्यू आर एस एम का परीक्षण जिसकी मारक क्षमता 30 किलोमीटर है।

 इसके अलावा भी डीआरडीओ द्वारा कई कई बार और कई छोटे-बड़े मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है

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