रस्सी से 1 इंच भी नहीं हिला, यहां बांस के सहारे खींचा जाता है विश्व का तीसरा सबसे बड़ा 45 फीट ऊंचा रथ
झारसुगुड़ा के कुकुरझंगा स्थित श्री पतितपावन श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यहां 45 फीट ...और पढ़ें

झारसुगुड़ा के कुकुरझंगा स्थित श्री पतितपावन श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा की अनूठी परंपरा
HighLights
कुकुरझंगा में रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में।
45 फीट ऊंचा, 16 पहियों वाला विश्व का तीसरा सबसे बड़ा रथ।
रथ को रस्सियों की बजाय बांस से खींचने की अनूठी परंपरा।
संवाद सहयोगी, झारसुगुड़ा। शहर के निकट कुकुरझंगा स्थित श्री पतितपावन श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कुकुरझंगा का यह भव्य रथ विश्व का तीसरा सबसे बड़ा रथ माना जाता है। इसकी ऊंचाई 45 फीट है और इसमें पुरी के नंदीघोष रथ की तरह 16 पहिए लगाए गए हैं। रथ निर्माण कार्य में 15 अनुभवी बढ़ई लगे हुए हैं और अंतिम सजावट व कारीगरी का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, केन्दुझर के श्री बलदेवजीउ का 72 फीट ऊंचा रथ दुनिया का सबसे ऊंचा रथ माना जाता है, जबकि पुरी के नंदीघोष रथ की ऊंचाई भी 45 फीट है। इसी कारण कुकुरझंगा का 45 फीट ऊंचा 16 पहियों वाला रथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इस रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी खींचने की परंपरा है। जहां अधिकांश स्थानों पर रथ को रस्सियों से खींचा जाता है, वहीं कुकुरझंगा में इस विशाल रथ को चार मजबूत बांसों के सहारे श्रद्धालु आगे बढ़ाते हैं।
जनश्रुति के अनुसार, एक बार ग्रामीणों ने रथ को रस्सी से खींचने का प्रयास किया था, लेकिन रथ एक इंच भी नहीं हिला। इसके बाद से यहां बांस के सहारे रथ खींचने की अनूठी परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है।
