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ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर में प्रवेश शुल्क और पूजा पर रोक के खिलाफ नागरिक संगठनों ने अदालत में दी चुनौती

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:09 PM (GMT+05:30)

कोणार्क सूर्य मंदिर में प्रवेश शुल्क और नवग्रह पीठ पर पूजा-पाठ की रोक के खिलाफ दो नागरिक संगठनों ने अदालत ...और पढ़ें

नवग्रह पीठ के आसपास तारबंदी और निकास द्वार बंद करने का भी विरोध।

नवग्रह पीठ के आसपास तारबंदी और निकास द्वार बंद करने का भी विरोध।

HighLights

  1. नागरिक संगठनों ने कोणार्क मंदिर में प्रवेश शुल्क को चुनौती दी।

  2. नवग्रह पीठ पर पूजा-पाठ की रोक का भी विरोध।

  3. अदालत ने अधिकारियों से जवाब मांगा, निकास द्वार खुला।

संवाद सूत्र, पुरी। विश्व धरोहर कोणार्क सूर्य मंदिर में प्रवेश शुल्क वसूली, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की कथित मनमानी और नवग्रह पीठ में पूजा-पाठ से जुड़ी गतिविधियों पर रोक के खिलाफ दो नागरिक संगठनों ने स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

संगठनों ने मंदिर परिसर में लंबे समय से पूजित नवग्रह पीठ के आसपास तारबंदी कर क्षेत्र को सीमित करने, पूजा सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने और पीठ को स्थानांतरित करने की कथित कोशिशों पर भी आपत्ति जताई है।

मामले की सुनवाई करते हुए सिविल जज की अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। अदालत से नोटिस मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने मंदिर का बंद निकास द्वार फिर से खोल दिया है।

नवग्रह पीठ के आसपास तारबंदी पर आपत्ति

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कोणार्क मंदिर परिसर स्थित नवग्रह पीठ में दर्शन और पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। आरोप है कि पुरातत्व विभाग ने नवग्रह पीठ के चारों ओर तारबंदी कर क्षेत्र को सीमित कर दिया था।

इसके साथ ही पूजा सामग्री की बिक्री, हवन और यज्ञ जैसी धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक लगाने की कार्रवाई की गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रसाद और भोग बेचने वाली दुकानों को जबरन हटाया गया।

वहीं, मंदिर का निकास द्वार नवग्रह पीठ के रास्ते से होने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए नवग्रह पीठ के दर्शन में बाधा उत्पन्न हो रही थी।

सिविल सूट संख्या 73/2006 के तहत दायर मामला

कोणार्क-गोपी विकास ट्रस्ट और ओडिशा बायोडायवर्सिटी फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कोणार्क की अदालत में सिविल सूट संख्या 73/2006 दायर किया है। मामले में केंद्रीय संस्कृति सचिव, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक, पुरी सर्किल के अधीक्षक और स्थानीय संरक्षण अधिकारी सहित सात लोगों को पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न इतिहासकारों के शोध, ऐतिहासिक दस्तावेजों, बंगाल गजेटियर, ओडिशा गजेटियर तथा पुरातत्व कानून सहित अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया है। करीब 200 पृष्ठों में तैयार विस्तृत शोधपरक शिकायत में मंदिर में प्रवेश शुल्क से छूट और पूजा-अर्चना के अधिकार के पक्ष में कानूनी तर्क प्रस्तुत किए गए हैं।

25 तारीख को जवाब तलब, 29 को सुनवाई

अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बीते 25 तारीख को सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 29 तारीख को निर्धारित होने की जानकारी दी गई है।

इस मामले की पैरवी कोणार्क बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीजय बराल के साथ अधिवक्ता माधव पति, अशोक बिशूल, भगवान महापात्र, विजय महांती, रश्मिता शतपथी और अख्तरुन नेशा कर रहे हैं।

पूजा और दर्शन के अधिकार के लिए जारी रहेगी कानूनी लड़ाई

अधिवक्ताओं ने मंदिर में प्रवेश और पूजा-अर्चना के अधिकार को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही गई है।

नागरिक संगठनों का कहना है कि कोणार्क सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ नवग्रह पीठ से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं के अधिकारों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।