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ओडिशा के कलिंगा घाटी में भूस्खलन का खतरा, चट्टान गिरने के बाद आवागमन अनिश्चितकाल के लिए बंद

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:58 AM (IST)

ओडिशा की कलिंगा घाटी में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया ...और पढ़ें

ओडिशा के कलिंगा घाटी में भूस्खलन का खतरा

ओडिशा के कलिंगा घाटी में भूस्खलन का खतरा

HighLights

  1. कलिंगा घाटी में भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद।

  2. स्थानीय व्यापारियों और लोगों की आजीविका पर गहरा संकट मंडराया।

  3. NHAI पर स्थायी समाधान न करने का आरोप, वैकल्पिक मार्ग की मांग।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। लगातार बारिश से प्रभावित कलिंगा घाटी ने पूरे क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्ष भी इसी तरह हुई भारी बारिश के दौरान भूस्खलन से कलिंगा घाटी मार्ग को व्यापक नुकसान पहुंचा था। सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया था और करीब डेढ़ महीने तक इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद रहा था।

भूस्खलन की आशंका को देखते हुए कंधमाल जिला प्रशासन ने 23 और 24 सितंबर को कलिंगा घाटी में यातायात पूरी तरह बंद रखा था। हालांकि घाटी के अंधारकोट क्षेत्र के पास चल रहा सड़क चौड़ीकरण कार्य लगातार बारिश के कारण ध्वस्त हो गया। इसके कुछ समय बाद ही भूस्खलन प्रभावित स्थल पर एक विशाल चट्टान नीचे आ गिरी। इसके बाद कंधमाल जिलाधिकारी ने इस मार्ग पर वाहनों के आवागमन पर अनिश्चितकाल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया।

आजीविका काफी हद तक कलिंगा घाटी पर निर्भर

इस आदेश के बाद कंधमाल और गंजाम जिले की सीमा से लगे क्षेत्रों के लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। विशेष रूप से कलिंगा और दुर्गाप्रसाद क्षेत्र के व्यापारी अपने कारोबार को लेकर चिंता में हैं। उनकी आजीविका काफी हद तक कलिंगा घाटी मार्ग पर निर्भर है। 

कोई ढाबा चलाता है, कोई पान-चाय की दुकान, तो कोई होटल और रेस्तरां संचालित करता है। इन प्रतिष्ठानों से न केवल उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार मिलता है।

लोगों की रोजी-रोटी पर संकट 

घाटी मार्ग बंद होने से इन लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर, सड़क बंद होने के कारण अब लोगों को चकपाद होकर बरहमपुर जाना पड़ रहा है। 

कलिंगा से भंजनगर की दूरी सामान्य रूप से 35 किलोमीटर है, जिसे तय करने में लगभग एक घंटा लगता है। लेकिन चकपाद मार्ग से जाने पर दूरी बढ़कर करीब 85 किलोमीटर हो जाती है और यात्रा में ढाई घंटे तक का समय लग रहा है। इसके साथ ही वाहन किराया भी अधिक देना पड़ रहा है। अतिरिक्त खर्च और समय की बर्बादी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।

केवल अस्थायी मरम्मत कर दी गई

अब सवाल उठ रहा है कि पिछले वर्ष कलिंगा घाटी में भूस्खलन के बाद जब यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा, तब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने उससे क्या सीख ली? भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या योजना बनाई गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि केवल अस्थायी मरम्मत कर दी गई, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसका परिणाम अब फिर से सामने आ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो कोई वैकल्पिक मार्ग विकसित किया गया और न ही संवेदनशील भूस्खलन स्थलों की समुचित मरम्मत की गई। इसके कारण क्षेत्र के लोगों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

महत्वपूर्ण मार्ग की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं

राष्ट्रीय राजमार्ग-157 के अंतर्गत आने वाली कलिंगा घाटी सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की है, लेकिन लोगों का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

पिछले वर्ष हुए भूस्खलन के बाद क्षेत्रवासियों ने मांग की थी कि या तो शीघ्र वैकल्पिक सड़क का निर्माण किया जाए अथवा भूस्खलन संभावित स्थानों की पहचान कर स्थायी मरम्मत और सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में लोगों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

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