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ओडिशा: अपने ही जेल में कैदी बने सुपरिटेंडेंट, दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप में हुए गिरफ्तार

Published: Mon, 21 Sep 2026 12:51 PM (IST)

चौद्वार सर्किल जेल के अधीक्षक सुजीत राउल को गिरफ्तार कर उसी जेल में कैदी के रूप में रखा गया है, जहां वे कभी प्रभारी थे।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. जेल अधीक्षक सुजीत राउल को गिरफ्तार कर अपनी ही जेल में रखा गया।

  2. दो कैदियों के भागने के बाद मिनट्स बुक में हेराफेरी का आरोप।

  3. राज्य में पहली बार, अधीक्षक अपनी ही जेल में कैदी।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। जिस जेल में रहकर वह कभी कैदियों की बैरक और सेल की जिम्मेदारी संभालते थे, आज उसी जेल की कालकोठरी में उन्हें कैदी बनकर रहना पड़ रहा है।

चौद्वार सर्किल जेल के अधीक्षक सुजीत राउल को गिरफ्तार कर लिया गया है। चौद्वार थाना पुलिस ने उन्हें भुवनेश्वर स्थित उनके शहीदनगर आवास से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां जमानत याचिका खारिज होने पर उन्हें चौद्वार जेल की हाजत में भेज दिया गया।

राज्य में यह संभवतः पहला मामला है, जब किसी जेल अधीक्षक को गिरफ्तार कर उसी जेल में रखा गया है, जहां वह प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। मंडल कारागार के महत्वपूर्ण मिनट्स बुक में कथित हेराफेरी करने के आरोप में सुजीत राउल के खिलाफ चौद्वार थाने में मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि जेल से दो बिहारी अपराधियों के फरार होने के बाद खुद को बचाने के लिए सुजीत राउल ने दस्तावेजों में हेराफेरी की थी। इस संबंध में तत्कालीन जेलर संतोषिनी दास ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है याचिका 

गिरफ्तारी से बचने के लिए सुजीत राउल ने पहले ओडिशा हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उनकी जमानत याचिका फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 2025 की रात चौद्वार जेल से मधुकांत राणा और राजा साहनी नामक दो कैदी फरार हो गए थे। उस समय जेल अधीक्षक सुजीत राउल ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे।

आरोप है कि अपनी इस अवैध अनुपस्थिति को छिपाने के लिए उन्होंने जेल की मिनट्स बुक में फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने दस्तावेजों में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के साथ-साथ जेलर की जानकारी के बिना उनके कागजात पर कथित रूप से जाली हस्ताक्षर भी कराए।

इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन जेलर संतोषिनी दास ने चौद्वार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।

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