शेषनाथ राय, भुवनेश्वर

असम, पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर गली से लेकर दिल्ली तक हाय-तौबा मची हुई है। देश में इनकी घुसपैठ कैसे हुई और कैसे इन लोगों ने यहां की नागरिकता हासिल कर ली। इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम आदमी भी सवाल खड़ा कर रहा है। लेकिन व्यवस्था में सुधारने करने के लिए कोई ठोस पहल अबतक धरातल पर नजर नहीं आ रही है। इसका जीता जागता उदाहरण देश के सबसे शांति प्रिय राज्य ओडिशा है।

ओडिशा प्रदेश की 476 किलोमीटर समुद्री सीमा है। जहां से बांग्लादेशी घुसपैठिए आसानी से भारत में प्रवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इतनी लंबी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने तो 18 समुद्री थानों का निर्माण किया है, मगर इनके लिए मात्र नौ थाना के लिए जरूरी पुलिसकमियों के पद ही मंजूर हैं। उतने ही कर्मचारी काम भी कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो इनके पास न तो पर्याप्त मात्रा में हथियार हैं और न ही बोट आदि का प्रबंध है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बांग्लादेशी के साथ असम में नागरिकता गंवाने वाले अधिकांश लोग अपनी धरपकड़ से बचने के लिए ओडिशा में प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में राज्य की तटीय सुरक्षा के लिए बनाए गए थानों की दयनीय दशा पर केंद्र या राज्य सरकार का ध्यान न जाना अपने आप में किसी बड़े संकट को आमंत्रण देने जैसा है।

यही नहीं इतनी लंबी समुद्री सीमा होने और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं होने से बांग्लादेशी घुसपैठियों के ओडिशा में प्रवेश की जितनी संभावना है, उससे कहीं अधिक आतंकवादियों के भी घुसने की है। हाल के दिनों में आतंकवादियों के राउरकेला, केंद्रपाड़ा, संबलपुर व कटक के साथ संपर्क को देखते हुए ऐसी संभावना को बल मिलता है।

इन सबके बीच सबसे बड़ी बात यह है पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर पर आतंकवादी हमले के खतरे को ध्याना में रखते हुए समय समय पर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से मुआयना भी किया जाता रहा है। वैसे इन दिनों राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ की आशंका चर्चा में है। सरकारी तथ्य के मुताबिक राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या 3987 है जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक है। आज राज्य के कई जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठिए देखे जा सकते हैं। केवल महाकालपड़ा, पारादीप या बालेश्वर तट ही नहीं राजधानी भुवनेश्वर की बस्तियों में भी इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

राज्य की समुद्री सीमा पर थाने

1. बालेश्वर : बलरामगड़ी, कक्षाफल, तलसरी।

2. भद्रक : धामरा, बुड़ामणि, कषिया।

3. केंद्रपाड़ा : जम्मू, तालचुआ, तंतीआपाल।

4. जगत¨सपुर : पारादीप, बंदरगाह, जेटी मुहाना।

5. पुरी : पेंठकटा, अस्तरंग, अरखकुदा, चंद्रभागा।

6. गंजाम : आर्यपल्ली, सोनापुर।

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कोट

वर्ष 2011 में बलरामगड़ी में घुसपैठ करते समय एक बांग्लादेशी को पकड़ा गया था, इसके बाद कोई घुसपैठिया नहीं पकड़ा गया है। हालांकि गैरसरकारी तथ्य को माने तो हर दिन बांग्लादेशी घुसपैठ कर रहे हैं और बेधड़क कर रहे हैं।

-प्रण¨वदु आचार्य, एडीजी, तट सुरक्षा।

Posted By: Jagran