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स्कूल-कॉलेज बंद, NDRF-पुलिस के साथ मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी; 'अर्णव' के खतरे के बीच ओडिशा में हाई अलर्ट 

Published: Mon, 26 Oct 2026 11:18 AM (IST)

बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात 'अर्णव' के खतरे को देखते हुए ओडिशा में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस, ओड्राफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. ओडिशा में संभावित चक्रवात 'अर्णव' के लिए हाई अलर्ट जारी।

  2. स्कूल-कॉलेज बंद, NDRF और पुलिस की 33 टीमें तैनात।

  3. शून्य जनहानि लक्ष्य, मंत्रियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात ‘अर्णव’ के खतरे को देखते हुए ओडिशा पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। तेज हवा, भारी वर्षा और जलभराव की आशंका को देखते हुए केंद्रीय रेंज के अंतर्गत आने वाले सात जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

इनमें कटक ग्रामीण, जगतसिंहपुर, जाजपुर, केंद्रापड़ा, खुर्दा, नयागढ़ और पुरी शामिल हैं। संवेदनशील और तटीय क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती के साथ आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है।

केंद्रीय रेंज के आइजी डा. सत्यजीत नायक ने चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को जिला प्रशासन, ओड्राफ, अग्निशमन सेवा, ओसडमा और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तैयारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चार जिलों में ओड्राफ की टीमें तैनात

संभावित खतरे को देखते हुए निचले, बाढ़ प्रभावित, संवेदनशील और तटीय इलाकों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पुरी, जगतसिंहपुर, कटक और खुर्दा जिलों में ओड्राफ की चार टीमें तैनात की गई हैं।

पुलिस प्रशासन लोगों को जोखिम वाले क्षेत्रों से निकालकर चक्रवात आश्रय स्थलों तक पहुंचाने में सहयोग कर रहा है। इस दौरान बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

सड़कों पर यातायात सामान्य बनाए रखने के लिए पुलिस संबंधित विभागों के साथ मिलकर जलभराव दूर करने और सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम करेगी।

एंबुलेंस, अग्निशमन वाहनों और राहत दलों की आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने के बाद खाली हुए इलाकों में चोरी और लूटपाट रोकने के लिए पुलिस गश्त और रात्रिकालीन पहरेदारी बढ़ाई जाएगी।

तटीय इलाकों में विशेष सतर्कता

जगतसिंहपुर, केंद्रापड़ा और पुरी जिलों में विशेष तटीय सतर्कता बरती जा रही है। समुद्र तटों पर लोगों की आवाजाही रोकने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सभी जिला पुलिस कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेंगे और आपातकालीन सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।

चक्रवात के बाद बिजली, स्वास्थ्य, अग्निशमन और सड़क जैसी आवश्यक सेवाओं की जल्द बहाली के लिए भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाया गया है।

ओडिशा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल सरकारी बुलेटिन व प्रशासन की सलाह पर भरोसा करें। अनावश्यक यात्रा से बचें तथा जलमग्न सड़कों, गिरे पेड़ों, बिजली के खंभों और लटकते तारों से दूर रहें।

प्रशासन के निर्देश पर तुरंत चक्रवात आश्रय स्थलों में चले जाएं। सोशल मीडिया पर अफवाह या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी थाने या पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क करें अथवा 112 पर फोन करें।

चक्रवात को लेकर छह जिलों में ओड्राफ-एनडीआरएफ की 33 टीमें तैनात

बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के चक्रवात में बदलने की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार अलर्ट हो गई है। संभावित चक्रवात से निपटने के लिए राज्य सरकार ने दक्षिण ओडिशा के छह जिलों में विशेष तैयारी की है।

इन जिलों में ओड्राफ की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की छह टीमों को तैनात किया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आठ जिलों में चक्रवात प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी के लिए दो उपमुख्यमंत्रियों और छह मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये मंत्री 27 से 29 अक्टूबर तक संबंधित जिलों में रहकर प्रशासन के साथ समन्वय बनाएंगे।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में राजीव भवन स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई।

इसमें विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल, मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरि और नवरंगपुर के जिलाधिकारियों ने भी तैयारियों की जानकारी दी।

मौसम विभाग के अनुसार, संभावित चक्रवात के उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने की आशंका है। इसके प्रभाव से दक्षिण ओडिशा के कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने शून्य जनहानि का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अधिकारियों को मुख्यालय में रहने का निर्देश

मंत्री सुरेश पुजारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यालय आने के बजाय अपने कार्यस्थल से ही वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ें।

जिला स्तर पर व्हाट्सएप समूह बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़ी सूचनाएं तत्काल साझा करने को कहा गया है। उन्होंने मीडिया के साथ नियमित और सही संवाद बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि किसी तरह की गलत सूचना या भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

मंत्री ने कहा कि राहत केंद्रों में शरण लेने वाले लोगों के साथ अतिथि जैसा व्यवहार किया जाए। उनके भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाए।

बच्चों के लिए दूध और शिशु आहार की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता बरतने का निर्देश दिया गया है।

आठ जिलों में मंत्रियों की तैनाती

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कोरापुट में उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव और रायगड़ा में उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिड़ा को जिम्मेदारी दी है। इसी तरह कंधमाल में मंत्री रवि नारायण नायक, गंजाम में विभूति भूषण जेना, गजपति में सूर्यवंशी सूरज, नवरंगपुर में कृष्ण चंद्र पात्र, मलकानगिरि में नित्यानंद गोंड और कालाहांडी में मुकेश महालिग को तैनात किया गया है।

छह जिलों में स्कूल-कालेज बंद

संभावित चक्रवात के मद्देनजर गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और नवरंगपुर में स्कूल, कालेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया गया है। अन्य जिलों में स्थिति के अनुसार प्रशासन निर्णय लेगा।

सभी जिला स्तरीय अधिकारियों की छुट्टियां रद कर उन्हें मुख्यालय में रहने को कहा गया है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के अलावा ब्लाक, तहसील और नगर निकायों में 24 घंटे नियंत्रण कक्ष संचालित किए जा रहे हैं।

कच्चे मकानों, झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को चिह्नित कर सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाने की तैयारी की गई है। प्रसव के नजदीक पहुंच चुकी गर्भवती महिलाओं को पहले ही अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मां गृह में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

गंजाम में सर्वाधिक 11 टीमें तैनात

प्रशासन ने छह जिलों में ओड्राफ और एनडीआरएफ की कुल 33 टीमों को तैनात किया है। इनमें गंजाम में ओड्राफ की नौ और एनडीआरएफ की दो, गजपति में छह और एक, रायगड़ा में तीन और एक, कोरापुट में तीन और एक तथा मलकानगिरि में तीन और एक टीम शामिल है। नवरंगपुर में भी तीन टीमें आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।

समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है। छह जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों, जलप्रपातों, बांधों और पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई है।

कृषि विभाग ने किसानों को 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी धान, मक्का, मांडिया और अन्य फसलों की जल्द कटाई कर सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है।

अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, सर्पदंश के उपचार के इंजेक्शन और क्लोरीन की गोलियों का भंडार रखने के साथ पेयजल शुद्धीकरण की व्यवस्था की जा रही है।

बिजली और संचार सेवाएं बाधित होने पर शीघ्र बहाली के लिए अतिरिक्त उपकरण तैयार रखे गए हैं। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, उनके उपचार और चारे की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करते हुए संभावित चक्रवात से होने वाले नुकसान को रोकने और शून्य जनहानि का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

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