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'अर्णव' का खौफ: ओडिशा में 29 अक्टूबर तक स्कूल-कॉलेज बंद, धान बचाने के लिए दिन-रात कटाई कर रहे किसान

Published: Mon, 26 Oct 2026 11:04 AM (IST)

चक्रवात अर्णव की आशंका के चलते मालकानगिरी जिले में किसानों ने धान की फसल बचाने के लिए दिन-रात कटाई तेज कर दी है।

एआई के जरिए बनाई गई तस्वीर

एआई के जरिए बनाई गई तस्वीर

HighLights

  1. मालकानगिरी में चक्रवात अर्णव के कारण भारी बारिश की आशंका।

  2. किसान दिन-रात धान की फसल कटाई में जुटे, फसल बचाने की कोशिश।

  3. एनडीआरएफ टीमें तैनात, स्कूल बंद, निचले इलाकों से निकासी की तैयारी।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में उठे संभावित चक्रवात अर्णव को लेकर मालकानगिरी जिले में सतर्कता बढ़ा दी गई है। 26 से 28 अक्टूबर तक भारी वर्षा की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार धान की फसल को बारिश से बचाने के लिए किसान दिन-रात कटाई में जुटे हैं।

कहीं हार्वेस्टर से धान काटा जा रहा है तो कहीं मजदूरों की मदद से फसल घर पहुंचाई जा रही है। उधर, संभावित चक्रवात से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने भी कमर कस ली है।

एनडीआरएफ और ओड्राफ की टीमें तैनात की जा रही हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

बारिश की आशंका के चलते जिले के विभिन्न क्षेत्रों में धान की कटाई तेज हो गई है। किसान अपनी साल भर की मेहनत को बर्बाद होने से बचाने के लिए जल्द से जल्द फसल समेटने में लगे हैं। जिन खेतों तक हार्वेस्टर नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां मजदूरों को लगाकर कटाई कराई जा रही है।

कई किसान तो धान पूरी तरह पकने से पहले ही कटाई करने को मजबूर हैं। उन्हें डर है कि लगातार बारिश होने पर खेतों में खड़ी फसल के साथ काटकर रखे गए धान को भी नुकसान पहुंच सकता है। धान भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

प्रशासन की ओर से किसानों को सलाह दी जा रही है कि पकी हुई फसल की जल्द कटाई करें, लेकिन कच्चे धान को जल्दबाजी में काटने से बचें। कटाई के बाद धान को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद चक्रवात की आशंका से किसानों की चिंता कम नहीं हो रही है।

कालिमेला में तैनात होगी एनडीआरएफ की टीम

संभावित चक्रवात अर्णव से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। कटक से एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम एक कमांडेंट और दो उप अधिकारियों के नेतृत्व में सोमवार रात तक कालिमेला में तैनात कर दी गई।

वहीं, ओड्राफ की 36 सदस्यीय टीम माथिली पहुंचकर मोर्चा संभालने के लिए तैयार है। अग्निशमन विभाग की टीमों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी प्रथमेश अरविंद के निर्देश पर जिले के सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र 29 अक्टूबर तक बंद रहेंगे।

सतीगुड़ा में आयोजित सभी खेल गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है। सभी प्रखंडों के अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी

जिलाधिकारी ने सभी तहसीलदारों को निचले इलाकों और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। जिले के चार स्थायी चक्रवात आश्रय स्थलों के साथ सभी अस्थायी आश्रय स्थलों को भी तैयार रखने को कहा गया है।

एक तरफ प्रशासन संभावित चक्रवात से निपटने की तैयारी में जुटा है, तो दूसरी तरफ किसान अपनी फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि बारिश का असर कम रहने पर उनकी मेहनत बच जाएगी।

फिलहाल जिले के लोगों की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में चक्रवात अर्णव का मालकानगिरी की खेती और जनजीवन पर कितना असर पड़ेगा, यह मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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