जेएनएन, भुवनेश्वर/ राउरकेला : चक्रवाती तूफान फणि से ओडिशा के तटवर्ती 11 जिलों में भयंकर तबाही हुई है। जैसे जैसे दिन गुजर रहा है तबाही के मंजर की तस्वीर और साफ होती जा रही है। आलम यह है कि तूफान गुजर जाने के 36 घंटा गुजर जाने के बावजूद कई हिस्सों में बिजली, पानी और खाने के सामानों की आपूर्ति सुचारू ढंग से नहीं हो पाई है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां बचाव व राहत कार्य उतनी गति नहीं पकड़ पाया है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि अधिकांश क्षेत्रों में राहत पहुंचाई जा रही है। इस बीच राज्य सरकार ने तूफान प्रभावितों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है।

राजधानी भुवनेश्वर, कटक और पुरी में हालत सबसे ज्यादा खराब है। पुरी में शुक्रवार को 180 से 245 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के कारण सबसे अधिक क्षति हुई है। पुरी जिले के ब्रह्मगिरी, कृष्ण प्रसाद, सातपाड़ा, सत्यवादी क्षेत्र में ज्यादा नुकसान हुआ है। वहीं जगन्नाथ मंदिर में भी तूफान के चलते दैनिक नीति प्रभावित हुई है। पुरी रेलवे स्टेशन 10 मई तक के लिए बंद कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में बिजली और दूर संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ गया है। राज्य में तूफान से मरने वालों की संख्या 39 पहुंच गई है। इनमें पुरी जिले में सबसे अधिक 12 लोगों की मौत हुई हैं। हालांकि राज्य सरकार मरने वालों की यह संख्या स्वीकार नहीं कर रही है। राज्य के राहत कमिश्नर कार्यालय की मानें तो अब तक राज्य में केवल सात लोगों की ही मौत हुई है। तूफान में सैकड़ों लोग घायल हैं जिनमें से अनेक लोगों को इलाज के लिए अस्पातल में भर्ती कराया गया है।

इस बीच मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हवाई मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन करने के बाद रविवार को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने राहत व बचाव कार्य की निगरानी करने के लिए चार अधिकारियों की टीम को विशेष दायित्व सौंपा है। साथ ही सरकार की ओर से राहत व पुनर्वास के लिए घोषणा की हैं। राज्य के तटीय क्षेत्रों में फणि तूफान के प्रभाव से पेड़, मकान, बिजली के खंभे, मोबाइल टावर उखड़ गए हैं जिससे सड़कों पर आवागमन बुरी तरह बाधित हुआ है। इससे पूरी तरह सामान्य होने में अभी लंबा समय लगने की आशंका है। फणि से हुए नुकसान का आकलन भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। एनडीआरएफ, ओड्राफ, अग्निशमन विभाग के साथ विभिन्न सेवाभावी संगठनों से जुड़े लोग राहत कार्य में जुटे हैं। पेड़ों को सड़कों से हटाकर आवागमन बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पतालों में बिजली नहीं होने के कारण घायलों का इलाज तथा आपरेशन में परेशानी हो रही है। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिन रात पेयजल की आपूर्ति टैंकर के जरिए किया जा रहा हैं।

राज्य सरकार ने की राहत पैकेज की घोषणा

सरकार की ओर से घर टूटने पर 95,200 रुपये, आंशिक टूटने पर पांच हजार रुपये, पूरी तरह से नष्ट होने पर हाउसिग स्कीम से पुनर्वास करने, फसल एवं पालतू पशुओं के नष्ट होने पर क्षतिपूर्ति, पुरी, खोद्र्धा जिले में 50 किलो चावल के साथ दो हजार रुपये अतिरिक्त सहायता, केंद्रापाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक जिले में विशेष सहायता की घोषणा सरकार की ओर से की गई है। राहत शिविरों में रहने वालों को 15 दिन तक बना बनाया भोजन देने की व्यवस्था भी की गई है।

हवाई सेवा बहाल, स्पेशल ट्रेनें चलाई गई

हवाई सेवा बहाल होने के साथ ही भुवनेश्वर से ट्रेनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। इधर पूर्व तट रेलवे के सूत्रों के अनुसार तूफान के कारण भुवनेश्वर, पुरी व खोद्र्धा रेलवे स्टेशनों को भारी नुकसान हुआ है। जिनकी मरम्मत का कार्य धीरे धीरे चल रहा है। पुरी रेलवे स्टेशन को 10 मई तक बंद कर दिया गया। शनिवार को भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से कुछ ट्रेनों को चलाया गया है। वहीं, दक्षिण पूर्व रेलवे के सूत्रों के अनुसार हावड़ा से भुवनेश्वर होते हुए तीन स्पेशल ट्रेनों हावड़ा-यशवंतपुर, हावड़ा- वास्कोडिगामा और हावड़ा चेन्नई सेंट्रल का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा अन्य ट्रेने पहले की तरह रद रहेंगी। सूत्रों ने बताया कि आठ मई के बाद रेल सेवा सुचारू हो सकेगी।

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Posted By: Jagran

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