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INDIA गठबंधन को मिला नवीन पटनायक का साथ, चुनाव आयुक्त के खिलाफ पदयात्रा में शामिल होगी BJD  

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:36 AM (IST)

बीजद ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ...और पढ़ें

नवीन पटनायक। फाइल फोटो

नवीन पटनायक। फाइल फोटो

HighLights

  1. बीजद एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध में शामिल होगा।

  2. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई।

  3. करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का आरोप लगाया गया।

शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। लंबे समय से इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों से समान दूरी बनाए रखने का दावा करने वाली बीजू जनता दल (बीजद) ने अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ कदम मिलाने का फैसला किया है।

पार्टी ने घोषणा की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा दिल्ली में आयोजित विरोध पदयात्रा में उसके सांसद भी शामिल होंगे।

राजनीतिक हलकों में इसे बीजद की बदली हुई रणनीति और भाजपा के खिलाफ आक्रामक तेवर के रूप में देखा जा रहा है।

बीजद सुप्रीमो एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर पार्टी सांसदों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी राज्यसभा में बीजद संसदीय दल के नेता मानस मंगराज ने दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर ओडिशा समेत देशभर में करोड़ों मतदाताओं के मतदान अधिकार पर संकट खड़ा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा में 20 लाख से अधिक तथा देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

मंगराज ने कहा कि बीजद पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुकी है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्षता की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही है।

उन्होंने दावा किया कि भद्रक जिले के धामनगर विधानसभा क्षेत्र में सामने आया मामला एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण है।

वहां बीएलओ की जानकारी के बिना अल्पसंख्यक समुदाय के 227 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की शिकायत सामने आई है।

बीजद का आरोप है कि केवल धामनगर ही नहीं, बल्कि राज्य के कई हिस्सों में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं।

बीजद नेता ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किए जाने को भी संदेहास्पद बताते हुए कहा कि यह घटनाक्रम कई सवालों को जन्म देता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार प्रश्नचिह्न लग रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा है।

फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के खिलाफ काम 

सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए मंगराज ने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में फॉर्म-6 को लेकर जो निर्देश जारी किए थे, उन्हें अदालत ने अपने आदेश से जोड़ने की कोशिश की गई।

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि उसने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था। बीजद का आरोप है कि इससे चुनाव आयोग की भूमिका पर और गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद बीजद अब भाजपा के खिलाफ अधिक मुखर रणनीति अपनाने की दिशा में बढ़ रही है।

अब तक केंद्र और भाजपा के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप झेल रही पार्टी का विपक्षी दलों के साथ मंच साझा करने का फैसला राज्य की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

हालांकि मानस मंगराज ने स्पष्ट किया कि बीजद न तो इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और न ही एनडीए का, लेकिन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी इस आंदोलन में शामिल हो रही है।

मजबूरी या मजबूती?

दिल्ली में होने वाली विपक्षी पदयात्रा में बीजद की भागीदारी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ने जहां इसे बीजद की राजनीतिक मजबूरी बताया है, वहीं विपक्षी दल इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में एकजुटता का संदेश बता रहे हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईआर का मुद्दा ओडिशा की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी और गर्माने के संकेत दे रहा है।

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