ओडिशा बंद से BJD का किनारा: न NDA के साथ, न 'INDIA' का दिया साथ
बीजू जनता दल ने 8 अक्टूबर को होने वाले 'ओडिशा बंद' से खुद को अलग कर लिया है, जिसे विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A ने बुलाया है।

नवीन पटनायक
HighLights
बीजेडी ने 8 अक्टूबर के 'ओडिशा बंद' से खुद को अलग किया।
पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखी।
बंद नए खनन कानून और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर।
एजेंसी, भुवनेश्वर। नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल ने 8 अक्टूबर को होने वाले 'ओडिशा बंद' से खुद को अलग रखने का फैसला किया है। यह बंद विपक्षी दलों के समूह INDIA bloc द्वारा बुलाया गया है।
बीजेडी का कहना है कि वह बीजेपी और कांग्रेस, दोनों गठबंधनों से समान दूरी बनाए रखने की अपनी पुरानी नीति पर कायम रहेगी।
बीजेडी के मीडिया कॉर्डिनेटर लेनिन मोहंती ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस बंद का न तो समर्थन कर रही है और न ही विरोध। हालांकि, मोहंती ने यह भी याद दिलाया कि बीजेडी ने अपने स्तर पर नए खनन कानून और स्कूली किताबों में छपी 1,800 से ज्यादा गलतियों का कड़ा विरोध किया है।
इसके अलावा, वोटर लिस्ट के रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर बीजेडी नेताओं ने दिल्ली में हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था, लेकिन राज्य में वे अपनी स्वतंत्र राह पर ही चलेंगे।
क्यों बुलाया गया है ओडिशा बंद?
इंडी गठबंधन में शामिल 9 पार्टियों ने गुरुवार को 12 घंटे का यह बंद बुलाया है। इसके पीछे मुख्य कारण और मांगें इस प्रकार हैं-
- नए खनन कानून (MMDR अमेंडमेंट एक्ट 2026) का विरोध।
- स्कूली किताबों में हुई भारी गलतियों के चलते ओडिशा के शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग।
- वोटर लिस्ट में मतदाताओं के नाम कटने के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
बंद की तैयारियां और सरकार का रुख
कांग्रेस, वामपंथी दलों (CPI, CPM), समाजवादी पार्टी, एनसीपी और आरजेडी जैसे दलों ने एकजुट होकर बंद की तैयारियां तेज कर दी हैं। उन्होंने एक मशाल रैली भी निकाली और लोगों से बंद में शामिल होने की अपील की।
विपक्ष ने साफ किया है कि अस्पताल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, दवा की दुकानें और दूध की सप्लाई जैसी आपातकालीन और जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी।
दूसरी तरफ, ओडिशा बीजेपी के अध्यक्ष मनमोहन सामल ने दावा किया है कि इस बंद का आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बंद के दौरान शांति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
