ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP का डंका, 117 कॉलेजों में लहराया परचम; बीसीजेडी और कांग्रेस पस्त
ओडिशा में 2024 के आम चुनाव के बाद हुए छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी ने शानदार प्रदर्शन किया, कई प्रमुख कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जीत दर्ज की।

ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP का डंका
HighLights
एबीवीपी ने ओडिशा छात्रसंघ चुनावों में दबदबा बनाया।
337 कॉलेजों में से 117 में एबीवीपी को जीत मिली।
उत्कल विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने अध्यक्ष-सचिव पद जीते।
शेषनाथ राय, भुवनेश्वर। ओडिशा में 2024 के आम चुनाव के बाद छात्रसंघ चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा वाले छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का दबदबा देखने को मिला। एबीवीपी ने कई प्रमुख कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जीत दर्ज की।
नवीन पटनायक की विचारधारा वाले बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) को उत्कल विश्वविद्यालय में निराशा हाथ लगी और वह यहां खाता भी नहीं खोल सका। हालांकि, रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में बीसीजेडी ने जीत हासिल की। कांग्रेस की छात्र इकाई को भी चुनाव में निराशा हाथ लगी।
37 कॉलेजों में से 117 में एबीवीपी की जीत
जानकारी के मुताबिक, 12 विश्वविद्यालयों और 325 महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव हुए। गुरुवार को नतीजे घोषित किए गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 337 कॉलेजों में से 117 में एबीवीपी ने जीत दर्ज की। बीसीजेडी को 71 सीटें मिलीं, जबकि एनएसयूआई ने दो सीटें जीतीं। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 16 सीटों पर बाजी मारी।
उत्कल विश्वविद्यालय के नतीजों पर सबकी निगाहें थीं। आधी रात के आसपास घोषित परिणामों में एबीवीपी ने अध्यक्ष और सचिव पद पर कब्जा किया। उत्कल विश्वविद्यालय के अलावा बीजेबी कॉलेज, राजधानी कॉलेज और संबलपुर स्थित गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय में भी एबीवीपी ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। इन संस्थानों में मिली जीत से एबीवीपी समर्थकों में उत्साह है।
रेवेंसा विश्वविद्यालय और फकीर मोहन विश्वविद्यालय में नतीजे मिले-जुले रहे और दोनों छात्र संगठनों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा। जाजपुर जिले के 10 कॉलेजों में से 7 में बीसीजेडी और 3 में एबीवीपी ने जीत हासिल की।
कई कॉलेजों में निर्दलीयों ने चौंकाया
एबीवीपी के दबदबे के बीच निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शैलाबाला कॉलेज, खल्लिकोट कॉलेज और निमापड़ा कॉलेज में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। नतीजों से पता चला कि कई परिसरों में प्रमुख छात्र संगठनों के प्रभाव के साथ स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी निर्णायक रही।
