भुवनेश्वर, जेएनएन। कुआखाई नदी घाट पर छठ पूजा के दौरान उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के दौरान हुए हादसे को लेकर दैनिक जागरण में छपी खबर एवं हादसे में एक बच्चे की जान जाने को लेकर पूजा कमेटी से जुड़े पदाधिकारी व सदस्यों में चिंतन एवं मंथन का दौर शुरू हो गया है। हादसे के 36 घंटे बाद भी सरकार का कोई प्रतिनिधि या सरकारी अधिकारी द्वारा पीड़ित परिवार को ना ही कोई सहयता राशि की घोषणा की गई है और ना ही कोई सरकारी प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मुलाकात किया है, जिसे लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। 

वहीं दूसरी तरफ इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है, आगामी दिनों में इस तरह की घटना दोबारा न हो इसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने चिंतन करने की मांग की है। जानकारी के मुताबिक घाट पर अव्यवस्था एवं आतिशबाजी को लेकर समाज के कई सदस्यों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है और संगठन की आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है। कुछ लोग इस हादसे पर राजनीति करने से परहेज नहीं कर रहे हैं, और इस हादसे को हिन्दी विकास मंच एवं बिस्वास के साथ जोड़कर राजनीति कर रहे रहे हैं।

हालांकि आज से चार साल पहले 2016 में ही दोनों गुट की बैठक में सार्वजनिक रूप से मिलकर पूजा करने का समाज के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में निर्णय हुआ था। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा इस पर किसी संस्था को बदनाम करना उचित नहीं है, इसके लिए कहीं न कहीं कमेटी से जुड़े सभी सदस्य जिम्मेदार हैं, जिन्होंने घाट पर नदी के अन्दर ना ही बैरिकेड की व्यवस्था की और ना ही घाट पर समुचित लाइटिंग की व्यवस्था की।

आखिर कमेटी के लापरवाही का खामियाजा एक बच्चे को अपनी जिंदगी से हाथ धोकर भुगतना पड़ा है, जिसके लिए अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है कि आखिर यह हादसा कमेटी के लापरवाही के कारण हुई है या फिर प्रशासन की लापरवाही से। सरकार ने तो अभी तक पीड़ित परिवार के साथ किसी प्रकार की संवेदना तक जाहिर नहीं की है।

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यहां प्रशासन पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं कि हर साल इतनी तादाद में छठ व्रतियों के आगमन की बात जानने के बावजूद प्रशासन पहले से सचेत क्यों नहीं हुआ और सुरक्षा के मद्देनजर ठोस प्रबंध क्यों नहीं किया। 20 से 25 हजार लोगों की भीड़ को देखते हुए जिस प्रकार से प्रशासन की तरफ से घाट पर व्यवस्था की गई थी, वह भीड़ को देखते हुए पूरी तरह से नाकाफी थी। इस हादसे के लिए कमेटी के साथ प्रशासन भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है।

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Posted By: Babita kashyap

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