भुवनेश्वर, शेषनाथ राय। भारत सरकार से लेकर प्रदेश की सरकारों ने लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम तरह की योजनाएं शुरु की हैं, इन योजनाओं का बड़े आकार में लोग लाभ भी ले रहे हैं, मगर खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ ही रोजगार देने वाले संस्थान को अपनी मेहनत एवं लगन से लाभ पहुंचाने वाली ओडिशा की बिजली दीदी आम लोगों के लिए मिसाल बन गई हैं। ऐसी ही ओडिशा की एक बिजली दीदी हैं लोपामुद्रा महांती, जिनकी चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब हो रही है। 

कौन हैं लोपा मुद्रा महांती

लोपा मुद्रा महांती घर ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र एरसमा थाना अन्तर्गत पोखरियापड़ा गांव में है। सामाजिक विज्ञान से सन् 2012 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म करने के बाद दिसम्बर 2012 में ही उन्होंने स्थानीय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षिका बन गई। छोटे-छोटे कार्य के लिए किसी के सामने हाथ ना फैलाने पड़े लोपा अपने पिता के घर रहते हुए शिक्षादान करने लगी। समय बीता और 2017 में लोपा मुद्रा महांती की शादी पोखरियापड़ा में हो गई। इनके पति आटो चलाते हैं। ससुराल में कुछ दिन गुजारने के बाद लोपा ने पहले पंचायत स्तर पर प्राणी मित्र संस्थान में डेढ़ साल तक नौकरी की। इसके बाद सन् 2019 में ओडिशा सरकारी की योजना सेल्फ हेल्प ग्रुप अर्थात स्वयं सहायक ग्रुप की भर्ती निकली और उसमें परीक्षा दी तो वहां उनका चयन हो गया। इसके बाद वह बिजली वितरक कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रिक सिटी सप्लाई यूटिलिटी आफ ओडिशा अर्थात सेसु के साथ जुड़ गई और अपनी मेहनत एवं लगन से न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी बल्कि बिजली वितरक कंपनी के राजस्व को भी बढ़ाने का काम किया।

अब जागरूक हो गए हैं लोग 

दैनिक जागरण से बात करते हुए लोपा मुद्रा महांती ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में इस कार्य के लिए पहले हमें बहुत परेशानी उठानी पड़ी क्योंकि पहले तो लोग बिजली बिल भरते नहीं थे और जो लोग बिजली भरते थे, उन्‍होंने एक तार से कई तारों को जोड़ा हुआ था। कई लोग चोरी छिपे बिजली जला रहे थे। ऐसे में इन लोगों को जागरूक करते हुए उन्हें बिजली का कनेक्‍शन लेने, इनके यहां मीटर लगवाने और फिर बिजली वसूल करने की प्रक्रिया शुरु की। इस कार्य में कठिनाई आई मगर अब सब कुछ ठीक ठाक है। लोग अब जागरूक हो गए हैं और घर जाते ही मीटर रीडिंग मिल जाती है और लोग बिजली बिल का भुगतान कर देते हैं। 2019 सितम्बर तक हमने सेसु के अन्दर में काम किया अब जून 2020 से टाटा के अन्दर बिजली वसूलने का काम कर रही हूं।

किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता 

इसके लिए मैं सुबह 4:30 बजे उठ जाती हूं। घर के सभी काम खाना बनाने, पति को खाना खिलाने के बाद पति आटो लेकर मार्केट निकल जाते हैं और मैं सुबह 10 बजे बिजली बिल वसूलने के लिए निकल जाती हूं। वर्तमान समय में हमारे अन्दर में 210 घर हैं, जिनके यहां जाकर मीटर रीडिंग लेने के साथ ही पैसा लेना और फिर उसे जमा करती हूं। उन्होंने बताया कि जब हमने बिजली दीदी का कार्य शुरु किया तो अधिकांश लोगों के घरों पर बिजली बिल का एरियर था। लोग बिजली बिल जमा नहीं कर रहे थे। ऐसे में नियमित बिल के साथ धीरे-धीरे इन लोगों से बकाये बिल जमा करने के लिए हमने प्रेरित किया। जिससे शुरुआती के दिनों में महीने का 1 लाख 60 हजार रुपये तक का कलेक्शन होने लगा। लगभग 1200 पंचायत पोखरियापड़ा के अन्तर्गत जिन 210 घरों का मैं मीटर रीडिंग के साथ बिजली बिल लेती हूं, उन सभी घरों को पहले का बकाया बिजली बिल पूरी तरह से खत्म हो गया है। इससे अब महीने का इन घरों से 70 से 80 हजार रुपया कलेक्शन हो रहा है। बदले में मुझे महीने का 5 से 6 हजार रुपया मिल जाता है। इससे हमें अब छोटे-मोटे कार्य के लिए ससुराल में भी किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

प्रदेश में हैं 200 बिजली दीदी

यहां उल्लेखनीय है कि यह केवल मात्र एक बिजली दीदी की कहानी है। प्रदेश में ऐसी लगभग 200 बिजली दीदी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत व लगन से न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि बिजली वितरक कंपनी के राजस्व को बढ़ाने का काम किया है। सबसे खास बात यह है कि इस कार्य में बिजली दीदियों को शुरूआत में स्थानीय लोगों से कुछ परेशानी जरूर आयी मगर अब स्थानीय लोग भी खुश है कि उनके उपर बिजली बिल नहीं बकाया है, और बिजली वितरक कंपनी का भी राजस्व बढ़ गया है।

 

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