संयुक्त राष्ट्र। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में सख्त लहजे में दिए अपने भाषण में पाकिस्तान से अपने सीमा क्षेत्र से आतंकी मशीनरी को बंद करने को कहा। साथ ही, यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत कभी अपनी उस सीमाई अखंडता से समझौता नहीं करेगा, जिसका जम्मू-कश्मीर अविभाज्य हिस्सा है।

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मनमोहन ने एक तरह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत कश्मीर मुद्दे के समाधान की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सभी मुद्दों को समाधान शिमला समझौते के आधार पर करने का पक्षधर है। शुक्रवार को शरीफ ने यहां अपने भाषण में कश्मीर मुद्दा उठाते हुए यह मांग की थी। मनमोहन ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ शिमला समझौते के तहत द्विपक्षीय बातचीत के जरिये सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसमें जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है। भारत संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को पुराना मानता है।

मनमोहन ने कहा कि आतंकवाद अब भी हर जगह सुरक्षा और स्थायित्व के लिए गंभीर खतरा है और इससे पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की जान जाती है। हम लोग पिछले ही कुछ दिनों में अफ्रीका से एशिया तक इस बुराई के कई विस्तार को देख चुके हैं। उनका प्रत्यक्ष संदर्भ जम्मू के पास गुरुवार को हुए दोहरे आतंकी हमले थे, जिनमें दस लोगों की जान गई थी और केन्या के मॉल में हुआ आतंकी हमला था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार प्रायोजित सीमा पार का आतंकवाद भारत की विशेष चिंता है। यह भी सत्य है कि हमारे क्षेत्र में आतंक का केंद्र हमारे पड़ोस पाकिस्तान में है। जम्मू-कश्मीर समेत आपसी बातचीत के जरिये सभी मुद्दों के समाधान के लिए अपने को तैयार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बातचीत में प्रगति हो, इसके लिए अनिवार्य है कि पाकिस्तान की सीमा और उसके नियंत्रण वाले इलाके का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं हो।

उन्होंने कहा कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि आतंकी मशीनरी जिनका पाकिस्तान से भरण-पोषण होता है, उन्हें बंद किया जाए।

शरीफ के सामने रखेंगे सुबूत नई दिल्ली। मनमोहन सिंह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बातचीत के दौरान उनके सामने जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं के पीछे सीमा पार की साजिश के सुबूत भी पेश करने की तैयारी में हैं।

सूत्रों के अनुसार वह अब्दुल करीम टुंडा, अबू जुंदाल और यासीन भटकल जैसे लश्कर और इंडियन मुजाहिद्दीन के गिरफ्तार आतंकियों के आइएसआइ के बारे में किए गए खुलासे से भी शरीफ को अवगत कराएंगे। गृह मंत्रालय ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री को दी है। रिपोर्ट में सुबूतों के साथ आइएसआइ के भारत में आतंकी हमलों की साजिश में सक्रिय भूमिका का उल्लेख है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बातचीत से इतर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता पाक-अफगान सीमा के लड़ाकों के घाटी में पहुंचने की है। अंदेशा है कि पिछले दिनों सीमा पर कोहराम मचाने वाले तीनों आतंकी पाक अधिकृत कश्मीर के प्रशिक्षण शिविरों के अलावा कहीं अन्य से आए हो सकते हैं।

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