काठमांडू, प्रेट्र। नेपाल सरकार ने अपने भारत स्थित राजदूत दीप कुमार उपाध्याय को वापस बुलाने के फैसले को सही साबित करने के लिए उन पर तीन आरोप लगाए हैं। रक्षा मंत्री भीम रावल ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि राजदूतों को सरकार के निर्देशों को मानना चाहिए और राजनयिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

खबरों के अनुसार, उपाध्याय पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हटाने के माओवादी पार्टी की कोशिशों में नेपाली कांग्रेस का पक्ष लेने का आरोप है। इसके अलावा उन पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नेपाल में भारतीय राजदूत के साथ देश के पश्चिमी इलाकों का दौरा करने का आरोप भी लगाया गया है। रावल ने कहा कि उनकी वापसी का राष्ट्रपति विद्या भंडारी की भारत यात्रा रद होने से कोई लेनादेना नहीं है।

उल्लेखनीय है कि नेपाली कांग्रेस के नेता दीप कुमार उपाध्याय को पिछले साल अप्रैल में राजदूत बनाकर नई दिल्ली भेजा गया था। शुक्रवार देर रात तेजी से चले घटनाक्रम के बाद उन्हें वापस बुला लिया गया।

मीडिया में छाया रहा राजदूत को वापस बुलाने का मामला

इस बीच, उपाध्याय को वापस बुलाए जाने का मामला यहां की मीडिया में छाया हुआ है। शनिवार को कई बड़े अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। कांतिपुर समाचार ने लिखा कि राजदूत दीप कुमार उपाध्याय पर गठबंधन सरकार के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप है।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा रद होने को लेकर प्रधानमंत्री ओली और उपाध्याय में मतभेद था। उपाध्याय ने यात्रा रद होने पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। कांतिपुर समाचार ने दावा किया है कि शुक्रवार को यात्रा रद होने की सूचना मिलते ही उपाध्याय ने प्रधानमंत्री को फोन किया और कहा कि इससे नकारात्मक संदेश जाएगा। इससे प्रधानमंत्री नाराज हो गए और उपाध्याय को नई दिल्ली से बुलाने का फैसला कर लिया।

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