गाजा। आतंकी संगठन हमास के शासन वाले गाजा पट्टी में इजरायली सेना के हमले जारी हैं। हमास की ओर से भी झुकने के कोई संकेत नहीं हैं और वह इजरायली इलाकों में रॉकेट हमले जारी रखे है। दोनों ओर से खेले जा रहे इस खूनी खेल में अब तक 604 फलस्तीनी और 29 इजरायली अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। नागरिकों की मौतों के लिए इजरायली सेना ने हमास को जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका की ओर से किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद युद्धविराम के कोई संकेत नहीं हैं।

तीसरे हफ्ते में पहुंच रहे इस संघर्ष में मंगलवार को इजरायली वायुसेना ने कई मस्जिदों, एक स्टेडियम और हमास की सैन्य शाखा के दिवंगत कमांडर के घर को ध्वस्त कर दिया। फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एक अस्पताल पर हमले में पांच लोग मारे गए और कई डॉक्टरों समेत 70 घायल हुए हैं। मध्य गाजा के दील अल बलह में चार महिलाओं समेत एक ही परिवार के पांच लोग मारे गए। एक की मौत नुसीरत और एक खान यूनिस में मारा गया। दो फलस्तीनी परिवारों के करीब 30 सदस्य सोमवार रात को हुए हमलों में मारे गए। अब तक करीब 3,700 फलस्तीनी घायल हो चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि अब तक करीब 100 बच्चे जान गंवा चुके हैं।

इस बीच, अरब के कुछ टीवी स्टेशनों ने दावा किया है कि काइरो से गाजा में कुछ घंटों के लिए युद्धविराम की घोषणा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, हमास सरगना खालिद मशाल भी इस घोषणा के दौरान काइरो में मौजूद रहेगा। हमास की फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से कतर में सोमवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी काइरो में इजरायल और फलस्तीन के नेताओं से बैठकें कर संघर्ष विराम का रास्ता तलाशने में जुटे हैं। केरी ने गाजा के लिए 4.7 करोड़ डॉलर मदद की घोषणा भी की है। फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेन फेबियस ने भी तत्काल शांति की अपील की।

इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार को उसने नौ सैनिक खोए हैं। इसके साथ ही मरने वाले सैनिकों की संख्या 27 हो गई है। एक सैनिक लापता बताया जा रहा है। दो नागरिक भी मारे जा चुके हैं। हमास की ओर से सोमवार को 131 रॉकेट और मोर्टार दागे गए। सेना का दावा है कि मारे गए फलस्तीनियों में 180 आतंकी थे। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अनुमान लगाया है कि मारे गए लोगों में 70 से 80 फीसद आम नागरिक हैं। यूएन एजेंसियों ने बताया कि अब तक लगभग एक लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र के दफ्तरों में शरण ली है।

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