मुरझा रही धान की फसल, सूखे जैसे हालात से किसान चिंतित

जागरण संवाददाता, सरपतहां (जौनपुर): बारिश नहीं होने की वजह से सूखे जैसे हालात हो गए हैं। पानी के अभाव में खेत में दरारें फट गई हैं। मुरझा रही धान की खेती देख अन्नदाताओं के माथें पर बल पड़ रहा है।

वर्षा ऋतु में काफी देर से शुरू हुई बारिश के कारण रोपाई प्रभावित हुई। अगस्त में बारिश शुरू हुई तो अच्छी बारिश के आसार जगे और किसानों ने रोपाई कर डाली, लेकिन अब बारिश के अभाव में खेतों में दरारें फट रही हैं। नहरों से सिंचित जो क्षेत्र हैं वहां तो कमोवेश हालात थोड़े ठीक हैं। जहां सिंचाई के एकमात्र साधन निजी पंपिंग सेट ही हैं वहां किसान परेशान हैं। नरवारी गांव के किसान राघवेंद्र शुक्ल कहते हैं कि सीजन के अंत में यदि बारिश न हो तो एक-दो सिंचाई करके फसल को बचाया तो जा सकता है, लेकिन जब मानसून के शुरुआत से ही बारिश न हो रही हो तो उसे संभालना किसानों के बस की बात नहीं है। अरसियां के किसान रवींद्र तिवारी का कहना है कि मेरे गांव से लालापुर माइनर गुजरी है, लेकिन वह भी शो-पीस बनकर रह गई है। टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। कटघर के किसान आलोक पांडेय का कहना है कि उन्होंने दस बीघे धान की रोपाई पंपिंग सेट के सहारे जैसे-तैसे की है, लेकिन बरसात न होने से अब लग रहा है कि सब कुछ खत्म हो जाएगा। कुछ इसी तरह की पीड़ा जैनपुर गांव के किसान भाष्कर तिवारी की भी है। अपर जिला कृषि अधिकारी डाक्टर रमेश चंद्र यादव कहते हैं कि, धान के खेत में नमी बरकरार रखना बेहद आवश्यक है। किसी भी सूरत में दरारें न पड़ने पाएं वरना फसल सूख जाएगी। कहा कि इस बार धान का उत्पादन प्रभावित होना तय है। किसान इस समय अगेती आलू, तोरिया, गोभी आदि सब्जियों की खेती करके अपना घाटा रोक सकते हैं।

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