दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीएचडी विभाग में यूजीसी रेगुलेशन-2016 का पालन नहीं हो रहा है। विश्वविद्यालय में यूजीसी रेगुलेशन-2016 वर्ष 2018 से लागू है। लेकिन पीएचडी विभाग की ओर से उक्त रेगुलेशन का पालन अब तक सुनिश्चित नहीं हो सका है। नियम के विरुद्ध जाकर कोर्स वर्क प्रमाणपत्र बांटने का भी मामला प्रकाश में आ चुका है। हाल ही में कुलसचिव प्रो. मुश्ताक अहमद ने सख्ती दिखाते हुए पैट-2020 के शोधार्थियों को गलत तरीके से कोर्स वर्क प्रमाण पत्र बांटने के एक मामले में विभागीय कार्रवाई भी की है। अब पैट-2018, 2019 एवं 2020 के शोधार्थियों के बीच तीन तरह का कोर्स वर्क प्रमाण पत्र बांटने का मामला भी तूल पकड़ रहा है। पीएचडी विभाग की ओर से पैट 2018 के शोधार्थियों को पीआरटी का, पैट-2019 के शोधार्थियों को हस्तलिखित एवं पैट-2020 के शोधार्थियों के बीच कंप्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण पत्र वितरित किया गया है। पैट तीनों सत्रों के शोधार्थियों के बीच इसको लेकर भ्रम की स्थिति है। सभी एक दूसरे का कोर्स वर्क प्रमाण पत्रों का मिलान कर रहे हैं। कहते हैं, जब यूजीसी रेगुलेशन- 2016 विवि में वर्ष 2018 से लागू है, तो फिर उक्त गाइडलाइन के मुताबिक सभी तीनों सत्रों के शोधार्थियों को एक समान कोर्स वर्क प्रमाण पत्र क्यों नहीं दी गई। शोधार्थियों ने कहा कि जब पैट-2018 से जब सभी नियम बदल दिए गए हैं, तो फिर पैट-2018 के शोधार्थियों को पीआरटी लिखा कोर्स वर्क प्रमाणपत्र निर्गत कर दिया गया। वहीं, पैट-2019 के शोधार्थियों को बिना रेगुलेशन के किए कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। जहां पैट- 2020 के शोधार्थियों को कंप्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। वहीं, पैट-2019 के शोधार्थियों को हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण पत्र दिया गया। इतना ही नहीं पैट-2019 के शोधार्थी को बिना विषयवार क्रमांक आवंटित किए ही कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया। जिस कारण अधिकांश शोधार्थी के प्रमाण पत्र में यूजीसी नेट, जेआरएफ, टीचर फेलोशिप आदि अंकित है। दर्जनों शोधार्थी का एक जैसा क्रमांक देखा जा सकता है। पैट-2019 से विषयवार क्रमांक नहीं किया जा रहा आवंटित

पैट-2018 तक सभी शोधार्थी का विषयवार क्रमांक आवंटित किया गया है। यह क्रमांक कई मायने में बहुत अहम भी है। इसमें प्रथम तीन अक्षर विषय का एवं अगला दो अंक वर्ष का फिर क्रमांक दिया गया है। इससे शोधार्थी के विषय एवं नामांकन वर्ष सहित कई जानकारी सुविधाजनक रूप से मिल जाती है। बावजूद पैट-2019 से विषयवार क्रमांक आवंटित नहीं किया जा रहा है। जिस कारण क्रमांक से शोधार्थी की पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है। पीएटी-2019 के शोधार्थी को अबतक अंकपत्र निर्गत नहीं किया गया है। जबकि जल्द ही शोध प्रबंध जमा करने का अवधि भी पूर्ण हो रहा है। पीएचडी कोर्स वर्क का महत्व

कोई भी शोधार्थी किसी भी विश्वविद्यालय से पीएचडी कोर्स के बाद किसी अन्य विश्वविद्यालय से पीएचडी करते हैं, तो समान रेगुलेशन अनुसार होने पर उन्हें कोर्स वर्क परीक्षा से मुक्त कर दिया जाता है। पीएटी-2020 के कई शोधार्थी इस आधार पर अन्य विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे हैं।

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